नात लिरिक्स

Khwab Mein Aa Kar Meri Qismat Jaga Do Ya Nabi

ख़्वाब में आ कर मेरी क़िस्मत जगा दो या नबी

नात ख़्वान: शुऐब रज़ा वारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़्वाब में आ कर मेरी क़िस्मत जगा दो, या नबी !मेरे घर को भी कभी जन्नत बना दो, या नबी !

एक मुद्दत से मेरी आँखें बहुत बेचैन हैंमेरे घर से ये सभी दूरी मिटा दो, या नबी !

फीकी पड़ती जा रही है जाने क्यूँ उस की चमकचाँद को इक बार फिर तलवा दिखा दो, या नबी !

पहले तो पत्थर बना के अपनी गलियों का मुझेऔर फिर ना'लैन से ठोकर लगा दो, या नबी !

आब-ए-ज़मज़म पी लिया पर प्यास बुझती ही नहींअपने दस्त-ए-पाक से कौसर पिला दो, या नबी !

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