नात लिरिक्स

Khushi Hai Kaisi Ye Kyun Chehre Jagmagae Hain | Khuda Ke Fazl Se Ramzan Ke Roze Aaye Hain

ख़ुशी है कैसी ये क्यूँ चेहरे जगमगाए हैं | ख़ुदा के फ़ज़्ल से रमज़ाँ के रोज़े आए हैं

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

माह-ए-रमज़ाँ मुबारक हो ! माह-ए-रमज़ाँ मुबारक हो !माह-ए-रमज़ाँ मुबारक हो ! माह-ए-रमज़ाँ मुबारक हो !

ख़ुशी है कैसी ये, क्यूँ चेहरे जगमगाए हैंख़ुदा के फ़ज़्ल से रमज़ाँ के रोज़े आए हैंनिजात के हैं ये बादल जो फिर से छाए हैंहो जिन से राज़ी ख़ुदा ऐसे आप काम करोये माह-ए-रमज़ाँ है, इस का तुम एहतिराम करो

ख़ुशी है कैसी ये, क्यूँ चेहरे जगमगाए हैंख़ुदा के फ़ज़्ल से रमज़ाँ के रोज़े आए हैं

हुआ है क़ैद ल'ईं और इस के सब चेलेकि बंद हो गए दोज़ख़ के इस में दरवाज़ेखुला है बाब-ए-करम, ख़ुश हैं रब के सब बंदेकि शुक्र रब का, गुनहगारो ! सुब्ह-ओ-शाम करोये माह-ए-रमज़ाँ है, इस का तुम एहतिराम करो

ख़ुशी है कैसी ये, क्यूँ चेहरे जगमगाए हैंख़ुदा के फ़ज़्ल से रमज़ाँ के रोज़े आए हैं

जो रोज़े छोड़ के तुम दिन-दहाड़े खाओगेख़ुदा रसूल को तुम कैसे मुँह दिखाओगेसज़ा ये होगी कि दोज़ख़ में डाले जाओगेजो ख़ैर चाहो तो रोज़ों का इंतिज़ाम करोये माह-ए-रमज़ाँ है, इस का तुम एहतिराम करो

ख़ुशी है कैसी ये, क्यूँ चेहरे जगमगाए हैंख़ुदा के फ़ज़्ल से रमज़ाँ के रोज़े आए हैं

हर एक चेहरा है रौशन, खिली है दिल की कलीबढ़ी 'अक़ीदतें, ईमाँ को ताज़गी है मिलीअज़ानों की है सदा और लब पे ना'त-ए-नबीकि शुक्र रौनक़-ए-इफ़्तार पर तमाम करोये माह-ए-रमज़ाँ है, इस का तुम एहतिराम करो

ख़ुशी है कैसी ये, क्यूँ चेहरे जगमगाए हैंख़ुदा के फ़ज़्ल से रमज़ाँ के रोज़े आए हैं

करो तिलावत-ए-क़ुरआन आप कसरत सेक़रीब होते ही जाओगे रब की रहमत सेमिलेगा चैन दुरूदों से और 'इबादत सेकि ताक़ रातों में, ऐ मोमिनो ! क़ियाम करोये माह-ए-रमज़ाँ है, इस का तुम एहतिराम करो

ख़ुशी है कैसी ये, क्यूँ चेहरे जगमगाए हैंख़ुदा के फ़ज़्ल से रमज़ाँ के रोज़े आए हैं

ये बख़्शिशों का महीना है रहमतें भी हैंख़ुदा के फ़ज़्ल से इस माह में बरकतें भी हैंमुराद पाओगे जिन में वो सा'अतें भी हैंहर एक लम्हा, ऐ 'आसिम ! इसी के नाम करोये माह-ए-रमज़ाँ है, इस का तुम एहतिराम करो

ख़ुशी है कैसी ये, क्यूँ चेहरे जगमगाए हैंख़ुदा के फ़ज़्ल से रमज़ाँ के रोज़े आए हैं

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