नात लिरिक्स

Khuda Mehshar Mein Puchhega Guzari Zindagi Kaisi

ख़ुदा महशर में पूछेगा गुज़ारी ज़िंदगी कैसी

शायर: मौलाना अबू जाफ़रउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसीलरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी

मुझे भी मौत आनी है मगर मैं इस से ग़ाफ़िल थामेरा जीवन भी फ़ानी है मगर मैं इस से ग़ाफ़िल थाकफ़न बाज़ार में आ भी चुका लेकिन मैं ग़ाफ़िल थामेरी मय्यत का तख़्ता भी बना लेकिन मैं ग़ाफ़िल था

ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसीलरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी

मैं ग़फ़लत में गुनाह करता रहा अफ़सोस लेकिन अबमगर अब कोई भी अफ़सोस का बनता नहीं मतलबमुझे भी मौत लेने आ गई अब क्या करूँगा मैंअँधेरी क़ब्र में अब किस तरह तनहा रहूँगा मैं

ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसीलरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी

अँधेरी क़ब्र में मुझ को अकेला छोड़ आएँगेयहाँ ताक़त न दौलत ना ये रिश्ते काम आएँगेहिसाब-ए-ज़िंदगी देने उठाया जाएगा मुझ कोख़ुदा के सामने महशर में लाया जाएगा मुझ को

ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसीलरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी

ख़ुदा पूछेगा, बतला 'इल्म पर कितना रहा 'आमिलकहाँ पर ख़र्च की तूने ये दौलत कैसे की हासिलसवाल-ए-जिस्म भी होगा, सवाल-ए-ज़िंदगी होगासवाल-ए-'इल्म भी होगा, सवाल-ए-बंदगी होगा

ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसीलरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी

मैं कैसे सामना कर पाऊँगा रब के सवालों काछुपाऊँगा कहाँ रब से 'अमल-नामा गुनाहों कामेरे आ'ज़ा गवाही देंगे ख़ुद मेरे गुनाहों परमेरे आ'ज़ा गवाही देंगे ख़ुद मेरी ख़ताओं पर

ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसीलरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी

मेरे मौला ! वहाँ बस तू ही मेरा आसरा होगामेरा मुश्किल-कुशा तेरे सिवा न दूसरा होगावहाँ मुमकिन नहीं, जा'फ़र ! पकड़ से रब की बच पानावहाँ मुमकिन नहीं, जा'फ़र ! कहीं जा कर के छुप जाना

ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसीलरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी

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