नात लिरिक्स

Khuda Ki Hai Inayat Mah-e-Ramzan Aane Wala Hai

ख़ुदा की है इनायत माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

नात ख़्वान: जुनैद शैख़ अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुदा की है 'इनायत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला हैहुई मौला की रहमत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

मह-ए-रमज़ाँ, मह-ए-ग़ुफ़राँ, मह-ए-सुब्हाँ, मह-ए-रहमाँखुलेंगे बाब-ए-जन्नत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

मसाजिद होंगी फिर आबाद, शैताँ जल मरे नाशादमिले मोमिन को फ़रहत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

दिल-ए-मग़्मूम फिर इक बार ख़ुशियों से हुआ सरशारहुई हासिल मसर्रत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

ख़ुशी से झूमता है दिल, मची है क़ल्ब में हलचलमिली 'आशिक़ को फ़रहत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

तरावीह और नमाज़ों में कमी होगी न रोज़ों मेंकरो मिल कर ये निय्यत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

इलाही ! 'आफ़ियत देना, सलामत दिल 'अता करना'अता कर दे तू सेहत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

मैं रमज़ान-उल-मुबारक पाऊँ, रोज़े सारे रख पाऊँतू रख ज़िंदा सलामत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

नबी के 'इश्क़ में रोऊँ, मदीने के लिए तड़पूँख़ुदा दे सोज़-ओ-रिक़्क़त, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

रहूँ क़ाइम मैं तौबा पर, ख़ुदाया ! फ़ज़्ल ऐसा करगुनाहों से दे नफ़रत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

ख़ुदा ऐसी 'इनायत कर, मैं काँपू ख़ौफ़ से थर थरहो 'इस्याँ से हिफ़ाज़त, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

'इबादत में, रियाज़त में, दुरूदों में, तिलावत मेंइलाही ! दे दे लज़्ज़त, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

मुहम्मद मुस्तफ़ा का वासिता तू बख़्श दे, मौला !'अता कर बाग़-ए-जन्नत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

ख़ुदा ! 'अत्तार की बख़्शिश तू फ़रमा दे बिला-पुर्सिशतुफ़ैल-ए-आ'ला-हज़रत, माह-ए-रमज़ाँ आने वाला है

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