नात लिरिक्स

Khila Mere Dil Ki Kali Ghaus-e-Azam

खिला मेरे दिल की कली ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान नूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

खिला मेरे दिल की कली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !मिटा क़ल्ब की बे-कली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

मेरे चाँद ! मैं सदक़े, आजा इधर भीचमक उठे दिल की गली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरे रब ने मालिक किया तेरे जद कोतेरे घर से दुनिया पली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

वो है कौन ऐसा नहीं जिस ने पायातेरे दर पे दुनिया ढली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

कहा जिस ने 'या ग़ौस अग़िसनी' तो दम मेंहर आई मुसीबत टली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

नहीं कोई भी ऐसा फ़रियादी, आक़ा !ख़बर जिस की तुम ने न ली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

मेरी रोज़ी मुझ को 'अता कर दो, आक़ा !तेरे दर से दुनिया ने ली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

न माँगूँ मैं तुम से तो फिर किस से माँगूँ ?कहीं और भी है चली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

सदा गर यहाँ मैं न दूँ तो कहाँ दूँ ?कोई और भी है गली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

जो क़िस्मत हो मेरी बुरी, अच्छी कर दोजो 'आदत हो बद, कर भली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरा मर्तबा आ'ला क्यूँ हो न, मौला !तू है इब्न-ए-मौला-'अली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

क़दम गर्दन-ए-औलिया पर है तेरातू है रब का ऐसा वली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

जो डूबी थी कश्ती वो दम में निकालीतुझे ऐसी क़ुदरत मिली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

हमारा भी बेड़ा लगा दो किनारेतुम्हें ना-ख़ुदाई मिली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तबाही से नाओ हमारी बचा दोहवा-ए-मुख़ालिफ़ चली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तुझे तेरे जद से, उन्हें तेरे रब सेहै 'इल्म-ए-ख़फ़ी-ओ-जली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

मेरा हाल तुझ पर है ज़ाहिर कि पुतलीतेरी लौह से जा मिली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

ख़ुदा ही के जल्वे नज़र आए जब भीतेरी चश्म-ए-हक़-बीं खुली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

फ़िदा तुम पे हो जाए नूरी-ए-मुज़्तरये है इस की ख़्वाहिश-दिली, ग़ौसे-आ'ज़म !

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