नात लिरिक्स

Khel Cricket Na Sharaarat Ke Liye Aaya Hai, Maah-e-Ramzaan Ibaadat Ke Liye Aaya Hai

खेल क्रिकेट न शरारत के लिए आया है, माह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

माह-ए-रमज़ान ! माह-ए-रमज़ान !माह-ए-रमज़ान ! माह-ए-रमज़ान !

रमज़ान आ गया ! मह-ए-गुफ़रान आ गया !रमज़ान आ गया ! मह-ए-गुफ़रान आ गया !

खेल किरकेट न शरारत के लिए आया हैमाह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

ये शरी'अत की इता'अत के लिए आया हैमाह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

खेल किरकेट न शरारत के लिए आया हैमाह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

दूर इस मह में करो आप दिलों से नफ़रतएक दूजे से सदा करते रहो तुम उल्फ़तहाथ को हाथ में लो और गले मिलते रहोदुश्मनों से भी, मेरे दोस्तो ! तुम हँस के मिलोबुग़्ज़-ओ-कीना न 'अदावत के लिए आया है

खेल किरकेट न शरारत के लिए आया हैमाह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

नफ़्ल का फ़र्ज़ की मिक़्दार में पाओगे सवाबइस महीने का नहीं, मोमिनो ! कोई भी जवाबवाह ! क्या बात है, फ़रमाते हैं ये प्यारे नबीक़ैद हो जाते हैं इस माह में शैतान सभीनफ़्स-ए-शैताँ की मज़म्मत के लिए आया है

खेल किरकेट न शरारत के लिए आया हैमाह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

इस महीने के सभी रोज़े तुम्हें रखने हैंऔर नमाज़ों की भी पाबंदी तुम्हें करनी हैहक़ ग़रीबों का अदा, मोमिनो ! करना है तुम्हेंपेट भूकों का, यतीमों का भी भरना है तुम्हेंसदक़ा ख़ैरात की कसरत के लिए आया है

खेल किरकेट न शरारत के लिए आया हैमाह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

वक़्त-ए-सहरी में भी तुम खेल में लग जाते होफ़ज्र से पहले ही क्यूँ, दोस्तो ! सो जाते होसुब्ह से शाम तलक नेट चलाते तुम होवक़्त अपना क्यूँ गुनाहों में बिताते तुम होदोस्तो ! ये नहीं ग़फ़लत के लिए आया है

खेल किरकेट न शरारत के लिए आया हैमाह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

मग़्फ़िरत होती है इस मह में गुनाहगारों कीशर्मसारों की, बद-कारों, सियह-कारों कीवो है महरूम जो इस मह में भी महरूम रहाकीजिए तौबा गुनाहों से, है रहमान ख़ुदानार-ए-दोज़ख़ से हिफ़ाज़त के लिए आया है

खेल किरकेट न शरारत के लिए आया हैमाह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

रहमतों, बरकतों वाला है महीना ये हीपार बंदों का लगाता है सफ़ीना ये हीइस की हर रात अनोखी है, निराला दिन हैभर गया ख़ुशियों से 'आसिम का भी अब दामन हैमोमिनों की ये मसर्रत के लिए आया है

खेल किरकेट न शरारत के लिए आया हैमाह-ए-रमज़ान 'इबादत के लिए आया है

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