नात लिरिक्स

Kaunain Ke Dulha Ke Sadqe Mein Khudai Hai | Sunte Hain Ke Mehshar Mein With Tazmeen

कौनैन के दूल्हा के सदक़े में ख़ुदाई है | सुनते हैं कि महशर में तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कौनैन के दूल्हा के सदक़े में ख़ुदाई हैमहबूब-ए-करीमा ने हाँ शान वो पाई हैमौला ने फ़तर्दा की ख़ुश-ख़बरी सुनाई हैसुनते हैं कि महशर में सिर्फ़ उन की रसाई हैगर उन की रसाई है लो जब तो बन आई है

रहमत ने सर-ए-महशर क्या रंग जमाई हैसौग़ात-ए-करम देखो ला-तक़्नतू लाई हैआक़ा की शफ़ा'अत ने क्या धूम मचाई हैमचला है कि रहमत ने उम्मीद बँधाई हैक्या बात तेरी, मुजरिम ! क्या बात बनाई है

आ'माल-ए-सियह ने जब फिटकार दिया हम कोहम क्या कहें अपनों ने क्या प्यार दिया हम कोमाँ-बाप ने भी, आक़ा ! धुतकार दिया हम कोसब ने सफ़-ए-महशर में ललकार दिया हम कोऐ बेकसों के आक़ा ! अब तेरी दुहाई है

सरकार की 'अज़मत का जब ज़िक्र-ए-जली छेड़ोबाज़ार-ए-मोहब्बत में फिर होश-ओ-ख़िरद भेजोगुलदस्ता-ए-तन-मन-धन हर चीज़ ही, ऐ लोगो !यूँ तो सब उन्हीं का है पर दिल की अगर पूछोये टूटे हुए दिल ही ख़ास उन की कमाई है

यूँ बज़्म-ए-मोहब्बत से हरगिज़ न तू ख़ाली उठमहबूब की चौखट से ले कर के, सवाली ! उठसरकार-ए-मदीना के ऐ क़ल्ब-ए-फ़िदाई ! उठऐ दिल ! ये सुलगना क्या, जलना है तो जल भी उठदम घुटने लगा, ज़ालिम ! क्या धूनी रमाई है

दुनिया की नुमाइश पर अहबाब न इतराओअब ख़्वाब-ए-तग़ाफ़ुल से, ऐ यार ! ज़रा जागोदेती है सदा मय्यत कोई तो ज़रा सुन लोमुजरिम को न शर्माओ, अहबाब ! कफ़न ढक दोमुँह देख के क्या होगा, पर्दे में भलाई है

हुब्ब-ए-शह-ए-तयबा से हमवार हुए रस्तेहम हश्र में वर्ना फिर बस एड़ियाँ ही घिसतेऔर आतिश-ए-दोज़ख़ के शो'लो में भी हम फँसतेऐ 'इश्क़ ! तेरे सदक़े जलने से छुटे सस्तेजो आग बुझा देगी, वो आग लगाई है

तयबा-ओ-हरम दोनों हैं जा-ए-शरफ़ 'आबिदये फ़ैसला सुन ले अब न बात बड़ा, ज़ाहिद !सर सू-ए-हरम ख़म है, दिल तयबा का है साजिदतयबा न सही अफ़ज़ल मक्का ही बड़ा, ज़ाहिद !हम 'इश्क़ के बंदे हैं, क्यूँ बात बढ़ाई है

वो जिन की बुज़ुर्गी का कौनैन में है हल्लामुख़्तार-ए-शरी'अत हैं ला-रैब रसूलुल्लाहअय्यूब ! नहीं कोई उस ज़ात का हम-पल्लामतला' में ये शक क्या था, वल्लाह रज़ा ! वल्लाहसिर्फ़ उन की रसाई है, सिर्फ़ उन की रसाई है

कलाम:इमाम अहमद रज़ा ख़ान

तज़मीन:मुहम्मद अय्यूब रज़ा अमजदी

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