नात लिरिक्स

Karam Jo Aap Ka Aye Sayyed-e-Abrar Ho Jaye

करम जो आप का ऐ सय्यिद-ए-अबरार हो जाए

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान नूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

करम जो आप का, ऐ सय्यिद-ए-अबरार ! हो जाएतो हर बद-कार बंदा दम में नेको-कार हो जाए

जो मोमिन देखे तुम को महरम-ए-असरार हो जाएजो काफ़िर देख ले तुम को तो वो दीं-दार हो जाए

जो सर रख दे तुम्हारे क़दमों पे सरदार हो जाएजो तुम से सर कोई फेरे ज़लील-ओ-ख़्वार हो जाए

जो हो जाए तुम्हारा उस पे हक़ का प्यार हो जाएबने अल्लाह वाला वो जो तेरा यार हो जाए

अगर आए वो जान-ए-नूर मेरे ख़ाना-ए-दिल मेंमह-ओ-ख़ावर मेरा घर मतला'-ए-अनवार हो जाए

ग़म-ओ-रंज-ओ-अलम और सब बलाओं का मदावा होअगर वो गैसूओं वाला मेरा दिलदार हो जाए

'इनायत से मेरे सर पर अगर वो कफ़्श-ए-पा रख देंये बंदा ताजदारों का भी तो सरदार हो जाए

तलातुम कैसा ही कुछ है मगर, ऐ ना-ख़ुदा-ए-मनइशारा आप फ़रमा दें तो बेड़ा पार हो जाए

जो डूबा चाहता है वो तो है डूबा हुआ बेड़ाइशारा आप का पाए तो, मौला ! पार हो जाए

तुम्हारे फ़ैज़ से लाठी मिसाल-ए-शम'अ रौशन होजो तुम लकड़ी को चाहो तेज़-तर तलवार हो जाए

गुनह कितने ही और कैसे ही हैं पर, रहमत-ए-'आलम !शफ़ा'अत आप फरमाएँ तो बेड़ा पार हो जाए

भरम रह जाए महशर में, न पल्ला हल्का हो अपनाइलाही ! मेरे पल्ले पर मेरा ग़म-ख़्वार हो जाए

इशारा पाए तो डूबा हुआ सूरज बर-आमद होउठे ऊँगली तो मह दो बल्कि दो दो चार हो जाए

तेरा तस्दीक़ करने वाला है अल्लाह का मोमिनतेरा मुन्किर वो जिस को हक़ से ही इंकार हो जाए

मेरे साक़ी ! मय-ए-बाक़ी पिला दे एक 'आलम कोजो बाक़ी और प्यासा है तेरा मय-ख़्वार हो जाए

तुम्हारे हुक्म का बाँधा हुआ सूरज फिरे उल्टाजो तुम चाहो कि शब दिन हो अभी सरकार हो जाए

क़वाफ़ी और मज़ामीं अच्छे अच्छे हैं अभी बाक़ीमगर बस भी करो, नूरी ! न पढ़ना बार हो जाए

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