नात लिरिक्स

Kar Ke Barbad Umr Bhar Ya Rab | Aaj Aaya Hun Tere Dar Ya Rab

कर के बर्बाद उम्र भर या रब | आज आया हूँ तेरे दर या रब

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कर के बर्बाद 'उम्र-भर, या रब !आज आया हूँ तेरे दर, या रब !

रख़्त-ए-आ'माल सर-ब-सर, या रब !है गुनाहों से तर-ब-तर, या रब !

ख़ौफ़ आता है, काँप जाता हूँअपने आ'माल देख कर, या रब !

रोज़-ओ-शब, आह ! ज़हर-ए-'इस्याँ सेकट रहा है मेरा जिगर, या रब !

नफ़्स-ओ-शैतान ले उड़े मेरेदिल का सुख-चैन लूट कर, या रब !

मुझ को झुलसा रहा है अंदर सेमेरे 'इस्याँ का ये सक़र, या रब !

कौन बख़्शेगा जुज़ तेरे, मौला !मेरी तौबा क़ुबूल कर, या रब !

मेरे सारे गुनाह धो देगीतेरी रहमत की इक नज़र, या रब !

शर्म-ए-'इस्याँ से लब नहीं खुलते'अर्ज़ करती है चश्म-ए-तर, या रब !

'अफ़्व कर 'अफ़्व, ऐ 'अफ़ुव्व ऐ करीम !मैं हूँ नादिम गुनाह पर, या रब !

कर दे इक बार फिर मु'आफ़ मुझेमैं हूँ नादिम गुनाह पर, या रब !

हो के राज़ी 'उबैद से, मालिक !हर ख़ता कर तू दरगुज़र, या रब !

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