नात लिरिक्स

Kabe Ke Badrudduja Tum Pe Karoron Durood

काबे के बदरुद्दुजा तुम पे करोरों दुरूद

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

का'बे के बदरुद्दुजा ! तुम पे करोरों दुरूदतयबा के शम्सुद्दुहा ! तुम पे करोरों दुरूद

शाफ़े'-ए-रोज़-ए-जज़ा ! तुम पे करोरों दुरूददाफ़े'-ए-जुम्ला-बला ! तुम पे करोरों दुरूद

और कोई ग़ैब क्या तुम से निहाँ हो भलाजब न ख़ुदा ही छुपा, तुम पे करोरों दुरूद

दिल करो ठंडा मेरा वो कफ़-ए-पा चाँद सासीने पे रख दो ज़रा, तुम पे करोरों दुरूद

ज़ात हुई इंतिख़ाब, वस्फ़ हुए ला-जवाबनाम हुआ मुस्तफ़ा, तुम पे करोरों दुरूद

वो शब-ए-मे'राज राज, वो सफ़-ए-महशर का ताजकोई भी ऐसा हुआ, तुम पे करोरों दुरूद

तुम से खुला बाब-ए-जूद, तुम से है सब का वुजूदतुम से है सब की बक़ा, तुम पे करोरों दुरूद

आस है कोई न पास, एक तुम्हारी है आसबस है यही आसरा, तुम पे करोरों दुरूद

सीना कि है दाग़-दाग़, कह दो करे बाग़-बाग़तयबा से आ कर सबा, तुम पे करोरों दुरूद

तुम हो जवाद-ओ-करीम, तुम हो रऊफ़-ओ-रहीमभीक हो दाता 'अता, तुम पे करोरों दुरूद

ख़ल्क़ के हाकिम हो तुम, रिज़्क़ के क़ासिम हो तुमतुम से मिला जो मिला, तुम पे करोरों दुरूद

जाएँ न जब तक ग़ुलाम, ख़ुल्द है सब पर हराममिल्क तो है आप का, तुम पे करोरों दुरूद

बरसे करम की भरन, फूलें नि'अम के चमनऐसी चला दो हवा, तुम पे करोरों दुरूद

इक तरफ़ आ'दा-ए-दीं, एक तरफ़ हासिदींबंदा है तन्हा, शहा ! तुम पे करोरों दुरूद

क्यूँ कहूँ बेकस हूँ मैं, क्यूँ कहूँ बेबस हूँ मैंतुम हो मैं तुम पर फ़िदा, तुम पे करोरों दुरूद

गंदे निकम्मे कमीन, महँगे हों कौड़ी के तीनकौन हमें पालता, तुम पे करोरों दुरूद

ऐसों को ने'मत खिलाओ, दूध के शरबत पिलाओऐसों को ऐसी ग़िज़ा, तुम पे करोरों दुरूद

अपने ख़तावारों को अपने ही दामन में लोकौन करे ये भला, तुम पे करोरों दुरूद

कर के तुम्हारे गुनाह, माँगें तुम्हारी पनाहतुम कहो दामन में आ, तुम पे करोरों दुरूद

हम ने ख़ता में न की, तुम ने 'अता में न कीकोई कमी, सरवरा ! तुम पे करोरों दुरूद

आँख 'अता कीजिए, उस में ज़िया दीजिएजल्वा क़रीब आ गया, तुम पे करोरों दुरूद

काम वो ले लीजिए, तुम को जो राज़ी करेठीक हो नाम-ए-रज़ा, तुम पे करोरों दुरूद

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