नात लिरिक्स

Jo Madine Ke Tasawwur Mein Jiya Karte Hain

जो मदीने के तसव्वुर में जिया करते हैं

नात ख़्वान: शकील सिंधु क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो मदीने के तसव्वुर में जिया करते हैंहर जगह लुत्फ़ मदीने का लिया करते हैं

'इश्क़-ए-सरवर में जो हस्ती को फ़ना करते हैंभेद उल्फ़त के फ़क़त उन पे खुला करते हैं

माल-ओ-दौलत की दु'आ हम न, ख़ुदा ! करते हैंहम तो मरने की मदीने में दु'आ करते हैं

आग दोज़ख़ की जला ही नहीं सकती उन को'इश्क़ की आग में दिल जिन के जला करते हैं

दर्द-ओ-आलाम में तस्कीन उन्हें मिलती हैनाम उन का जो मुसीबत में लिया करते हैं

तू सलाम उन से दर-ए-पाक पे जा कर कहनाइल्तिजा तुझ से हम, ऐ बाद-ए-सबा ! करते हैं

क्यूँ फिरें शौक़ में हम माल के मारे मारेहम तो सरकार के टुकड़ों पे पला करते हैं

चाँद-सूरज का मुक़द्दर भी तो देखो अक्सरगुंबद-ए-ख़ज़रा के नज़्ज़ारे किया करते हैं

रश्क 'अत्तार को उन ज़र्रों पर आता है जोउन के ना'लैन के तल्वों से लगा करते हैं

क़ाबिल-ए-रश्क हैं, 'अत्तार ! वो क़िस्मत वालेदफ़्न जो मीठे मदीने में हुवा करते हैं

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