नात लिरिक्स

Jo Madine Hum Bhi Jaate To Kuchh Aur Baat Hoti

जो मदीने हम भी जाते तो कुछ और बात होती

नात ख़्वान: प्रोफ़ेसर अब्दुर्रउफ़ रूफ़ीशायर: बेकल उत्साहीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो मदीने हम भी जाते तो कुछ और बात होतीकभी लौट कर न आते तो कुछ और बात होती

मय-ए-'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा हम वहीं पी के मस्त रहतेसर-ए-हश्र लड़खड़ाते तो कुछ और बात होती

मेरी ज़ीस्त के 'अनासिर दर-ए-मुस्तफ़ा पे चल केमेरा साथ छोड़ जाते तो कुछ और बात होती

मेरे आँसुओं पे ना-हक़ न सितारो मुस्कुराओये जो तयबा देख पाते तो कुछ और बात होती

ये सितारों का तबस्सुम है नज़र-नवाज़ लेकिनजो हुज़ूर मुस्कुराते तो कुछ और बात होती

मुझे ज़हर देने वाले बड़े कम-नज़र हैं, आक़ा !तेरे नाम पर पिलाते तो कुछ और बात होती

ये हवा के मस्त झोंके जो इरम से आ रहे हैंयही तयबा हो के आते तो कुछ और बात होती

ये फ़रोग़-ए-'इल्म-ओ-दानिश, ये मता-ए-रंग-ए-'आलमयहाँ मुस्तफ़ा न आते तो कुछ और बात होती

ये जो ना'त-ए-पाक, बेकल ! सर-ए-बज़्म पढ़ रहे होकहीं तयबा में सुनाते तो कुछ और बात होती

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