नात लिरिक्स

Aane Waalo Ye To Bataao Shehr-e-Madina Kaisa Hai | Dekh Ke Jis Ko Jee Nahin Bharta Shehr-e-Madina Aisa Hai

आने वालो ये तो बताओ शहर-ए-मदीना कैसा है | देख के जिस को जी नहीं भरता शहर-ए-मदीना ऐसा है

नात ख़्वान: प्रोफ़ेसर अब्दुर्रउफ़ रूफ़ीशायर: इशरत गोधरवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आने वालो ! ये तो बताओ, शहर-ए-मदीना कैसा हैसर उन के क़दमों में रख कर, झुक कर जीना कैसा है

देख के जिस को जी नहीं भरता, शहर-ए-मदीना ऐसा हैआँखों को जो ठंडक बख़्शे, गुंबद-ए-ख़ज़रा ऐसा है

आने वालो ! ये तो बताओ, शहर-ए-मदीना कैसा है

गुंबद-ए-ख़ज़रा के साए में बैठ के तुम तो आए होउस साए में रब के आगे सज्दा करना कैसा है

आने वालो ! ये तो बताओ, शहर-ए-मदीना कैसा है

मैं भी चूम के आज आया हूँ उन महकती गलियों कोजो कुछ देखा उन गलियों में, कहीं न देखा ऐसा है

देख के जिस को जी नहीं भरता, शहर-ए-मदीना ऐसा है

दिल, आँखें और रूह तुम्हारी लगती है सैराब मुझेदर पे उन के बैठ के आब-ए-ज़मज़म पीना कैसा है

आने वालो ! ये तो बताओ, शहर-ए-मदीना कैसा है

हम मेहमान बने थे उन के, 'अर्श पे जो मेहमान हुएक्यूँ न क़िस्मत पर हो नाज़ाँ, जिन का आक़ा ऐसा है

देख के जिस को जी नहीं भरता, शहर-ए-मदीना ऐसा है

दीवानो ! आँखों से तुम्हारी इतना पूछ तो लेने दोवक़्त-ए-दु'आ रौज़े पे उन के आँसू बहाना कैसा है

आने वालो ! ये तो बताओ, शहर-ए-मदीना कैसा है

मिम्बर-ए-पाक-ए-रसूल भी देखा, देखा ख़ास मुसल्ला भीहरम शरीफ़ का हर मंज़र ही नज़र में जचता ऐसा है

देख के जिस को जी नहीं भरता, शहर-ए-मदीना ऐसा है

वक़्त-ए-रुख़्सत दिल को अपने छोड़ वहाँ तुम आए होये बतलाओ, इशरत ! उन के घर से बिछड़ना कैसा है

आने वालो ! ये तो बताओ, शहर-ए-मदीना कैसा है

वापस आएँ दिल नहीं करता छोड़ के उन की चौखट कोजान भी दे दें उन के दर पर, दिल में आता ऐसा है

देख के जिस को जी नहीं भरता, शहर-ए-मदीना ऐसा है

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