नात लिरिक्स

Jo Ishq-e-Nabi Ke Jalwon Ko Seenon Mein Basaya Karte Hain

जो इश्क़-ए-नबी के जल्वों को सीनों में बसाया करते हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: सिकंदर लखनवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो 'इश्क़-ए-नबी के जल्वों को सीनों में बसाया करते हैंअल्लाह की रहमत के बादल उन लोगों पे साया करते हैं

जब अपने ग़ुलामों की आक़ा तक़दीर जगाया करते हैंजन्नत की सनद देने के लिए रौज़े पे बुलाया करते हैं

मख़्लूक़ की बिगड़ी बनती है, ख़ालिक़ को भी प्यार आ जाता हैजब बहर-ए-दु'आ महबूब-ए-ख़ुदा हाथों को उठाया करते हैं

ऐ दौलत-ए-'इरफ़ाँ के मँगतो ! उस दर पे चलो जिस दर पे सदादिन-रात ख़ज़ाने रहमत के सरकार लुटाया करते हैं

गिर्दाब-ए-बला में फँस के कोई तयबा की तरफ़ जब तकता हैसुल्तान-ए-मदीना ख़ुद आ कर कश्ती को तिराया करते हैं

वो नज़'अ की सख़्ती हो, ऐ दिल ! या क़ब्र की मुश्किल मंज़िल होवो अपने ग़ुलामों की अक्सर इमदाद को आया करते हैं

है शुग़्ल हमारा शाम-ओ-सहर और नाज़, सिकंदर ! क़िस्मत परमहफ़िल में रसूल-ए-अकरम की हम ना'त सुनाया करते हैं

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