नात लिरिक्स

Jab Un Ka Karam Ho Jata Hai Jab Un Ki Ata Ho Jati Hai

जब उन का करम हो जाता है जब उन की अता हो जाती है

नात ख़्वान: हम्ज़ा अनवर रहमानीशायर: सिकंदर लखनवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जब उन का करम हो जाता है, जब उन की 'अता हो जाती हैआँखें भी मुनव्वर होती हैं, सीने पे जिला हो जाती है

हस्ती जो नबी की उल्फ़त में, वल्लाह ! फ़ना हो जाती हैमहबूब-ए-ख़ुदा के सदक़े में, महबूब-ए-ख़ुदा हो जाती है

दुख-दर्द हो कोई दुनियावी या ख़ौफ़-ए-लहद हो 'आसी कोऐ सल्ले-'अला ! उन की रहमत हर ग़म की दवा हो जाती है

मख़्लूक़ भी उल्फ़त करती है, ख़ालिक़ भी करम फ़रमाता हैजब उन की निगाह-ए-लुत्फ़-ओ-करम ऐ सल्ले-'अला हो जाती है

है नाम-ए-मुहम्मद सल्ले-'अला ख़ुशनूदी-ए-ख़ालिक़ का ज़री'आजो उन के वसीले से माँगो, मक़बूल दु'आ हो जाती है

क़ब्ज़े में ख़ुदाई है उन के, मुख़्तार हैं सारी ने'मत केदरबार-ए-रसूल-ए-अकरम से हर चीज़ 'अता हो जाती है

उम्मत से उन्हें है प्यार ऐसा, इक ठेस सी दिल पर लगती हैआक़ा के ग़ुलामों से सरज़द जब कोई ख़ता हो जाती है

हो गुंबद-ए-ख़ज़रा पेश-ए-नज़र, आँखों में सिकंदर ! आँसू होंफिर साया-फ़िगन उस के सर पर रहमत की घटा हो जाती है

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