नात लिरिक्स

Jab Masjid-e-Nabvi Ke Minar Nazar Aaye

जब मस्जिद-ए-नबवी के मीनार नज़र आए

नात ख़्वान: हाफ़िज़ मर्ग़ूब अहमद हमदानीशायर: मुहम्मद अली ज़हूरी क़सूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जब मस्जिद-ए-नबवी के मीनार नज़र आएअल्लाह की रहमत के आसार नज़र आए

मंज़र हो बया कैसे, अल्फ़ाज़ नहीं मिलतेजिस वक़्त मुहम्मद का दरबार नज़र आए

मंज़र हो बया कैसे, अल्फ़ाज़ नहीं मिलतेजब सामने आँखों के दरबार नज़र आए

बस याद रहा इतना, सीने से लगी जालीफिर याद नहीं क्या-क्या अनवार नज़र आए

दुख दर्द के मारों को ग़म याद नहीं रहतेजब सामने आँखों के ग़म-ख़्वार नज़र आए

मक्के की फ़ज़ाओं में, तयबा की हवाओं मेंहम ने तो जिधर देखा सरकार नज़र आए

छोड़ आया, ज़हूरी ! मैं दिल-ओ-जान मदीने मेंअब जीना यहाँ मुझ को दुश्वार नज़र आए

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