नात लिरिक्स

Jab Husn Tha Unka Jalwa Numa Anwar Ka Alam Kya Hoga

जब हुस्न था उन का जल्वा-नुमा अनवार का आलम क्या होगा

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: नज्म नो'मानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जब हुस्न था उन का जल्वा-नुमा, अनवार का 'आलम क्या होगा !हर कोई फ़िदा है बिन देखे, दीदार का 'आलम क्या होगा !

जिस वक़्त थे ख़िदमत में उन की बू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान-ओ-'अलीउस वक़्त रसूल-ए-अकरम के दरबार का 'आलम क्या होगा !

इक सम्त 'अली, इक सम्त 'उमर, सिद्दीक़ इधर, 'उस्मान उधरइन जगमग जगमग तारों में माहताब का 'आलम क्या होगा !

चाहें तो इशारों से अपने काया ही पलट दें दुनिया कीये शान है उन के ग़ुलामों की, सरदार का 'आलम क्या होगा !

चाहें तो इशारों से अपने काया ही पलट दें दुनिया कीये शान है ख़िदमत-गारों की, सरदार का 'आलम क्या होगा !

सुन सुन के सहाबा की बातें कुफ़्फ़ार मुसलमाँ होते थेफिर सरवर-ए-'आलम की, यारो ! गुफ़्तार का 'आलम क्या होगा !

सुन सुन के सहाबा की बातें कुफ़्फ़ार मुसलमाँ होते थेफिर मेरे रसूल-ए-अकरम की गुफ़्तार का 'आलम क्या होगा !

क़दमों में जबीं को रहने दो, चेहरे का तसव्वुर मुश्किल हैजब चाँद से बढ़ कर एड़ी है, रुख़्सार का 'आलम क्या होगा !

जब शम'-ए-रिसालत रौशन हो, क्यूँ-कर न जले परवाना-ए-दिलजब रश्क-ए-मसीहा आ जाए, बीमार का 'आलम क्या होगा !

जिस वक़्त हलीमा की गोदी अनवार-ए-ख़ुदा से रौशन थीउस वक़्त हलीमा दाई के घर-बार का 'आलम क्या होगा !

कहते हैं 'अरब के ज़र्रों पर अनवार की बारिश होती हैऐ नज्म ! न जाने तयबा के गुलज़ार का 'आलम क्या होगा !

ला-रैब, 'अरब के ज़र्रों पर अनवार की बारिश होती हैऐ नज्म ! न जाने तयबा के गुलज़ार का 'आलम क्या होगा !

तयबा से हवाएँ आती हैं, बेकल को सुकूँ मिल जाता हैइस पार का जब ये 'आलम है, उस पार का 'आलम क्या होगा

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।