नात लिरिक्स

Jab Gumbad-e-Khazra Pe Wo Pehli Nazar Gai

जब गुंबद-ए-ख़ज़रा पे वो पहली नज़र गई

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जब गुंबद-ए-ख़ज़रा पे वो पहली नज़र गईआँखों के रास्ते मेरे दिल में उतर गई

सर ख़म था, लब ख़मोश थे, आँखें थीं अश्कबारइक सा'अत-ए-बेदार थी जो कि गुज़र गई

बरसी थी इस क़दर कि नहा सा गया उधरवो बारिश-ए-करम मेरे दामाँ को भर गई

जो कह सका न लब से, मिली वो मुराद भीमेरे सुकूत पर भी शहा की नज़र गई

मर कर भी ना मरूँगा मैं, अल्लाह की क़समये जान उन के ज़िक्र में मेरी अगर गई

दिल भी है शाद-शाद, तबी'अत है पुर-बहारलगता है आज मेरी मदीने ख़बर गई

तयबा से लौटना किसी 'आशिक़ से पूछिएऐसा लगे कि रूह बदन से गुज़र गई

आवाज़, 'उबैद ! तेरी ब-फ़ैज़ान-ए-ना'त हीसीनों में 'आशिक़ान-ए-नबी के उतर गई

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