नात लिरिक्स

Jaan Ki Deewaar Gira De To Maza Aa Jaae

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाए

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाएमौत आक़ा से मिला दे तो मज़ा आ जाए

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाए

नींद आ जाए मुझे पढ़ते हुए उन पे दुरूदऔर ख़ुदा उन से मिला दे तो मज़ा आ जाए

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाए

उन की दहलीज़ पे जिस वक़्त पड़े मेरी नज़र'इश्क़ दीवाना बना दे तो मज़ा आ जाए

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाए

अपने महबूब के तलवों का मुझे भी धोवनएक-दो बूँद पिला दे तो मज़ा आ जाए

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाए

उन के ना'लैन कहाँ और कहाँ सर मेराफिर भी तौफ़ीक़ ख़ुदा दे तो मज़ा आ जाए

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाए

शहर-ए-सरकार से ला कर के कोई अज्वा खजूरसिर्फ़ इफ़्तार करा दे तो मज़ा आ जाए

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाए

छोड़ देते हों जिसे खा के मदीने के फ़क़ीरकोई वो जूठा खिला दे तो मज़ा आ जाए

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाए

और कुछ दिन तेरे महबूब का रौज़ा देखूँए ख़ुदा ! उम्र बढ़ा दे तो मज़ा आ जाए

जाँ की दीवार गिरा दे तो मज़ा आ जाए

अब तो, जावेद ! मदीने में मिलूँगी तुझ सेये ख़बर मौत सुना दे तो मज़ा आ जाए

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