नात लिरिक्स

In Aankhon Se Madine Ka Nazara Hum Bhi Dekhenge | Humko Bulana Ya Rasool Allah | Version 2

इन आँखों से मदीने का नज़ारा हम भी देखेंगे | हम को बुलाना या रसूलल्लाह

नात ख़्वान: लाइबा फ़ातिमाशायर: सईद आक़िलउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बड़ी उम्मीद है सरकार क़दमों में बुलाएँगेकरम की जब नज़र होगी मदीने हम भी जाएँगे

अगर जाना मदीने में हुवा हम ग़म के मारों कामकीन-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा को हाल-ए-दिल सुनाएँगे

क़सम अल्लाह की ! होगा वो मंज़र दीद के क़ाबिलक़यामत में रसूलुल्लाह जब तशरीफ़ लाएँगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

इन आँखों से मदीने का नज़ारा हम भी देखेंगेजमाल-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा के आक़ा हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

गुनाहों के समंदर में तो इंसाँ डूब जाते हैंजो डूबे को बचाता है किनारा हम भी देखेंगे

जमाल-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा के आक़ा हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

जहाँ जा कर ज़माने के सभी ग़म भूल जाते हैंसुकून-ए-क़ल्ब का ख़ित्ता वो प्यारा हम भी देखेंगे

जमाल-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा के आक़ा हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

मचलती है ये हसरत रोज़-ओ-शब दिल में, मेरे आक़ा !तेरी रहमत का कब होगा इशारा हम भी देखेंगे

जमाल-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा के आक़ा हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

वो जिस का नाम ले कर गिरने वाले भी सँभल जाएँजो है कौनैन में सब का सहारा हम भी देखेंगे

जमाल-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा के आक़ा हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

सख़ावत का वो दर जिस से कोई लौटा नहीं ख़ालीभरा अपनी तमन्ना का ये कासा हम भी देखेंगे

जमाल-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा के आक़ा हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

स'ईद 'आक़िल ! दु'आ है रहमतुल-लिल-'आलमीं का दरकि सदक़े में मुहम्मद के, ख़ुदाया ! हम भी देखेंगे

जमाल-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा के आक़ा हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

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