नात लिरिक्स

Imdad Kun Imdad Kun Ya Ghaus-e-Azam Dastagir | Imdad Kun Imdad Kun Ya Ghous-e-Azam Dastagir

इमदाद कुन इमदाद कुन या ग़ौस-ए-आज़म दस्तगीर

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ान बरेलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ रंज-ओ-ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

असीरों के मुश्किल-कुशा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !फ़क़ीरों के हाजत-रवा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

गिरा है बलाओं में बंदा तुम्हारामदद के लिए आओ, या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

तेरे हाथ में हाथ मैं ने दिया हैतेरे हाथ है लाज, या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

निकाला है पहले तो डूबे हुओं कोऔर अब डूबतों को बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

भँवर में फँसा है सफ़ीना हमाराबचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

क़सम है कि मुश्किल को मुश्किल न पायाकहा हम ने जिस वक़्त या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

मुरीदों को ख़तरा नहीं बहर-ए-ग़म सेकि बेड़े के हैं ना-ख़ुदा ग़ौस-ए-आ'ज़म

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

तुम्हीं दुख सुनो अपने आफ़त-ज़दों कातुम्हीं दर्द की दो दवा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

मेरी मुश्किलों को भी आसान कीजेकि हैं आप मुश्किल-कुशा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

कहे किस से जा कर हसन अपने दिल कीसुने कौन तेरे सिवा, ग़ौस-ए-आज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

मेरे चाँद ! मैं सदक़े, आजा इधर भीचमक उठे दिल की गली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

नज़र आए मुझ को न सूरत अलम कीन देखूँ कभी रू-ए-ग़म, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

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