नात लिरिक्स

Ilyas Qadri Par Aankhen Hain Band Hamari

इल्यास क़ादरी पर आँखें हैं बंद हमारी

नात ख़्वान: इमरान शैख़ अत्तारीशायर: अल्लामा राशिद क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तेरे दर पे ही, मुर्शिद ! पड़ा रहूँ मैंतेरा दर न छूटे, 'अत्तार पिया !

गुज़रेगी उन की चौखट पे 'उम्र अब ये सारीइल्यास क़ादरी पर आँखें हैं बंद हमारी

दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !मैं हूँ मँगता तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !

मुर्शिद की आमद ! मरहबा !'अत्तार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !सोहणे की आमद ! मरहबा !'अत्तार आए ! मरहबा !'अत्तार आए ! मरहबा !

कुछ कज-फ़हम न समझे इस राज़-ए-ज़िंदगी कोअहल-ए-नज़र ही जाने इल्यास क़ादरी कोसुन्नत पे चलके जिस ने ये 'उम्र है गुज़ारीइल्यास क़ादरी पर आँखें हैं बंद हमारी

सुन लो ! सुन लो ! सुन लो !

मुझे बे-सहारा समझे न ये दुश्मन-ए-ज़मानामेरे सर पे दस्त-ए-शफ़क़त मेरे पीर मुर्शिदी का

दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !मैं हूँ मँगता तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !

जितना हटाओगे तुम, उतने जुड़े रहेंगेउन की ही सम्त में हम अब तो मुड़े रहेंगेऐ मुन्किरो ! चलेगी साज़िश न ये तुम्हारीइल्यास क़ादरी पर आँखें हैं बंद हमारी

मुर्शिद की आमद ! मरहबा !'अत्तार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !सोहणे की आमद ! मरहबा !'अत्तार आए ! मरहबा !'अत्तार आए ! मरहबा !

दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !मैं हूँ मँगता तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !

तुम मानो या न मानो, दुनिया तो मानती हैहै ख़ैर-ख़्वाह-ए-उम्मत दुनिया ये जानती हैये दा'वत-ए-इस्लामी सुन लो है जाँ हमारीइल्यास क़ादरी पर आँखें हैं बंद हमारी

सुन लो ! सुन लो ! सुन लो !

गुज़रेगी उन की चौखट पे 'उम्र अब ये सारीगुज़रेगी उन की चौखट पे 'उम्र अब ये सारी

दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !मैं हूँ मँगता तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !

'अत्तार ने दिलों के गुलशन खिला दिए हैंमुझ जैसे बे-नवा भी क्या क्या बना दिए हैंदुनिया बदल के रख दी 'अत्तार ने हमारीइल्यास क़ादरी पर आँखें हैं बंद हमारी

मुर्शिद की आमद ! मरहबा !'अत्तार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !सोहणे की आमद ! मरहबा !'अत्तार आए ! मरहबा !'अत्तार आए ! मरहबा !

दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !मैं हूँ मँगता तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !

आल-ए-नबी का सब को मस्ताना कर दिया हैजाम-ए-मय-ए-सहाबा भी सब का भर दिया हैबिगड़ी ये ज़ीस्त, राशिद ! 'अत्तार ने सँवारीइल्यास क़ादरी पर आँखें हैं बंद हमारी

सुन लो ! सुन लो ! सुन लो !

मुझे बे-सहारा समझे न ये दुश्मन-ए-ज़मानामेरे सर पे दस्त-ए-शफ़क़त मेरे पीर मुर्शिदी का

दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !मैं हूँ मँगता तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !दर न छूटे तेरा, मेरे मुर्शिद पिया !

मुर्शिद की आमद ! मरहबा !'अत्तार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !सोहणे की आमद ! मरहबा !'अत्तार आए ! मरहबा !'अत्तार आए ! मरहबा !

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