नात लिरिक्स

Andhere Mein Dil Ke Charaagh-e-Mohabbat Ye Kis Ne Jalaaya Sawere Sawere

अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरे

नात ख़्वान: इमरान शैख़ अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरेलिया जब से मैंने ये नाम-ए-मुहम्मद, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे

ख़याल-ए-मदीना में नींद आ गई जब, क़रार आ गया बे-क़रारी को मेरीकिए सब्ज़-गुम्बद के मैंने नज़ारे, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे

अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरेलिया जब से मैंने ये नाम-ए-मुहम्मद, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे

'अक़ीदत की मंज़िल का बस राज़ है ये, 'इशा के वुज़ू से अदा हो सहर भी'इबादत का सौदा अँधेरे अँधेरे, मुनाफ़ा' कमाया सवेरे सवेरे

अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरेलिया जब से मैंने ये नाम-ए-मुहम्मद, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे

ख़ुदा की क़सम ! ये हक़ीक़त है सहरा की बे-नूर आँखों में भी नूर चमकातेरे सब्ज़-गुम्बद ने सूरज की किरनों को जो जगमगाया सवेरे सवेरे

अँधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे सवेरेलिया जब से मैंने ये नाम-ए-मुहम्मद, बड़ा लुत्फ़ आया सवेरे सवेरे

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