नात लिरिक्स

Ilahi Fazl Hai Tera Gada-e-Ala Hazrat Hun

इलाही फ़ज़्ल है तेरा गदा-ए-आला हज़रत हूँ

नात ख़्वान: मुहम्मद हसनैन अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इलाही ! फ़ज़्ल है तेरा, गदा-ए-आ'ला हज़रत हूँकरम है आप का, आक़ा ! गदा-ए-आ'ला हज़रत हूँ

वसीला सब सहाबा का, है सदक़ा आल-ए-ज़हरा काकरम है ग़ौस-ओ-ख़्वाजा का, गदा-ए-आ'ला हज़रत हूँ

मिली उम्मत मुहम्मद की, ग़ुलामी ग़ौस-ए-आ'ज़म कीदर-ए-ख़्वाजा का हूँ मँगता, गदा-ए-आ'ला हज़रत हूँ

मदीने आ के फिर जल्वा मैं देखूँ सब्ज़-गुंबद कारज़ा का, या नबी ! सदक़ा, गदा-ए-आ'ला हज़रत हूँ

ख़ुदा ! अहमद रज़ा ख़ाँ के चलूँ नक़्श-ए-क़दम पर मैं'अता तौफ़ीक़ तू फ़रमा, गदा-ए-आ'ला हज़रत हूँ

इलाही ! ये स'आदत दे, मदीने में शहादत देवसीला चार यारों का, गदा-ए-आ'ला हज़रत हूँ

ख़ुदाया ! हो करम ऐसा, बजा दूँ उन की सुन्नत काजहाँ में चार-सू डंका, गदा-ए-आ'ला हज़रत हूँ

अमीर-ओ-मालदारों की, जहाँ के ताजदारों कीमुझे, 'अत्तार ! क्या पर्वा, गदा-ए-आ'ला हज़रत हूँ

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