नात लिरिक्स

Huzoor Aap Aaye To Dil Jagmagaye

हुज़ूर आप आए तो दिल जगमगाए

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीशायर: रमज़ान शुकूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हुज़ूर ! आप आए तो दिल जगमगाएवगरना बिचारों का क्या हाल होताअसीरों कनीज़ों पे क्या कुछ गुज़रतीमुसीबत के मारों का क्या हाल होता

हुज़ूर ! आप आए तो दिल जगमगाए

हुज़ूर ! आप आए तो आईं बहारेंथीं हर-सम्त सल्ले-'अला की पुकारेंजो होता न माह-ए-मुबारक नबी कातो फिर इन बहारों का क्या हाल होता

हुज़ूर ! आप आए तो दिल जगमगाए

सभी अंबिया हैं सलामी को आएखड़े उन के पीछे क़तारें बनाएजो इन सब में प्यारे मुहम्मद न होतेतो लाखों हज़ारों का क्या हाल होता

हुज़ूर ! आप आए तो दिल जगमगाए

अदब से पुकारे मलाइक भी सारेकि तशरीफ़ लाए हैं आक़ा हमारेवो मे'राज में आसमाँ पर न जातेतो चाँद और सितारों का क्या हाल होता

हुज़ूर ! आप आए तो दिल जगमगाए

ज़मीं ख़ुश, फ़लक़ ख़ुश, हैं हूर-ओ-मलक ख़ुशख़ुदा ख़ुश है और सारी मख़्लूक़ भी ख़ुशजो होती न गर ख़ुश ये सारी ख़ुदाईतो रंगीं नज़ारों का क्या हाल होता

हुज़ूर ! आप आए तो दिल जगमगाए

क़ियामत में हम सब तो घबरा गए थेजहन्नम की आतिश से थर्रा गए थेहुज़ूर ! आप हम को न गर बख़्शवातेतो हम ग़म के मारों का क्या हाल होता

हुज़ूर ! आप आए तो दिल जगमगाए

ग़रीबों को अक्सर सताती थी दुनियायतीमों पे भी ज़ुल्म ढाती थी दुनियाअगर बन के ग़म-ख़्वार आक़ा न आतेतो फिर ग़म के मारों का क्या हाल होता

हुज़ूर ! आप आए तो दिल जगमगाए

हैं हम अपनी क़िस्मत पे नाज़ाँ, शुकूरी !मिला बा'द-ए-मुद्दत कि 'इज़्न-ए-हुज़ूरीजो सरकार हम को न दर पर बुलातेतो फ़ुर्क़त के मारों का क्या हाल होता

हुज़ूर ! आप आए तो दिल जगमगाए

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