नात लिरिक्स

Haqeeqat Mein Wo Lutf-e-Zindagi Paya Nahin Karte

हक़ीक़त में वो लुत्फ़-ए-ज़िंदगी पाया नहीं करते

नात ख़्वान: सिद्दीक़ इस्माइलशायर: हामिद लखनवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हक़ीक़त में वो लुत्फ़-ए-ज़िंदगी पाया नहीं करतेजो याद-ए-मुस्तफ़ा से दिल को बहलाया नहीं करते

ज़बाँ पर शिकवा-ए-रंज-ओ-अलम लाया नहीं करतेनबी के नाम-लेवा ग़म से घबराया नहीं करते

अरे ओ ना-समझ ! क़ुर्बान हो जा उन के रौज़े परये लम्हे ज़िंदगी में बार बार आया नहीं करते

ये दरबार-ए-मुहम्मद है, यहाँ अपनों का क्या कहनायहाँ से हाथ ख़ाली ग़ैर भी जाया नहीं करते

ये दरबार-ए-मुहम्मद है, यहाँ मिलता है बे-माँगेअरे नादाँ ! यहाँ दामन को फैलाया नहीं करते

मुहम्मद मुस्तफ़ा के बाग़ के सब फूल ऐसे हैंजो बिन पानी के तर रहते हैं, मुरझाया नहीं करते

जो उन के दामन-ए-रहमत से वाबस्ता हैं, ऐ हामिद !किसी के सामने वो हाथ फैलाया नहीं करते

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