नात लिरिक्स

Hajiyon Ke Ban Rahe Hain Qafile Phir Ya Nabi

हाजियों के बन रहे हैं क़ाफ़िले फिर या नबी

नात ख़्वान: हाजी मुहम्मद मुश्ताक़ अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हाजियों के बन रहे हैं क़ाफ़िले फिर, या नबी !फिर नज़र में फिर गए हज के मनाज़िर, या नबी !

कर रहे हैं जाने वाले हज की अब तय्यारियाँरह न जाऊँ मैं कहीं कर दो करम फिर, या नबी !

आह ! पल्ले ज़र नहीं, रख़्त-ए-सफ़र सरवर ! नहींतुम बुला लो तुम बुलाने पर हो क़ादिर, या नबी !

किस-क़दर था ख़ुश, मुझे जब पेश आया था सफ़रमुझ को अब की बार भी बुलवाइए फिर, या नबी !

दिल मेरा ग़मगीन है और जान भी है मुज़्तरिबमुर्शिदी का वासिता बुलवाइए फिर, या नबी !

ग़म के बादल छा रहे हैं, आह !  मेरे क़ल्ब परहाज़िरी की दो इजाज़त मुझ को तुम फिर, या नबी !

गुंबद-ए-ख़ज़रा के जल्वे देखने कब आऊँगाकब तक अब तड़पाओगे तुम मुझ को आख़िर, या नबी !

आप ही अस्बाब, आक़ा ! फिर मुहय्या कीजिएफिर दिखा दीजे मदीने के मनाज़िर, या नबी !

किस तरह तस्कीन दूँगा मैं दिल-ए-ग़मगीन कोरह गया गर हाज़िरी से मैं जो क़ासिर, या नबी !

मुझ पे क्या गुज़रेगी, आक़ा ! इस बरस गर रह गयामेरा हाल-ए-दिल तो है सब तुम पे ज़ाहिर, या नबी !

आह ! तयबा से अगर मैं दूर रह कर मर गयारूह भी रंजूर होगी किस-क़दर फिर, या नबी !

मिस्ल-ए-साबिक़ इस बरस भी कीजिए नज़र-ए-करममैं गुज़िश्ता साल आया था बिल-आख़िर, या नबी !

जो मदीने के लिए रहते हैं, आक़ा ! बे-क़रारवो भी हो जाएँ तेरे रौज़े पे हाज़िर, या नबी !

चाक सीना, चाक दिल, सोज़-ए-जिगर और चश्म-ए-तरदीजिए मुझ को तुफ़ैल-ए-'अब्द-ए-क़ादिर, या नबी !

बिल-यक़ीं क़ुरआन 'अज़मत पर तुम्हारी है गवाहशाहिद-ओ-क़ासिम हो तुम तय्यिब हो ताहिर, या नबी !

तुम को 'इल्म-ए-ग़ैब मौला ने 'अता फ़रमा दियाकर दिया हर जा पे हाज़िर और नाज़िर, या नबी !

इस्तिक़ामत दीन पर मुझ को 'अता फ़रमाइएया रसूलल्लाह ! बरा-ए-आल-ए-यासिर, या नबी !

आप सब नबियों में अफ़ज़ल और मैं बदकार आह !'आसियों में हूँ यगाना और नादिर, या नबी !

'आसी-ओ-बदकार के अपने ख़ुदा-ए-पाक सेबख़्शवा दो सब सग़ाइर और कबाइर, या नबी !

बाल भी बीका न मेरा तो कोई कर पाएगाक्यूँ कि मेरे तुम हो हामी और नासिर, या नबी !

तिश्नगान-ए-दीद को हो दीद की शरबत 'अताअज़-तुफ़ैल-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म 'अब्द-ए-क़ादिर, या नबी !

आह ! मेरा क्या बनेगा गर न हज पर जा सकाहो करम 'अत्तार पर हो जाए हाज़िर, या नबी !

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