नात लिरिक्स

Hajiyo Aao Shahanshah Ka Rauza Dekho

हाजियो आओ शहंशाह का रौज़ा देखो

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हाजियो ! आओ, शहंशाह का रौज़ा देखोका'बा तो देख चुके का'बे का का'बा देखो

रुक्न-ए-शामी से मिटी वहशत-ए-शाम-ए-ग़ुर्बतअब मदीने को चलो सुब्ह-ए-दिल-आरा देखो

आब-ए-ज़मज़म तो पिया, ख़ूब बुझाईं प्यासेंआओ, जूद-ए-शह-ए-कौसर का भी दरिया देखो

ज़ेर-ए-मीज़ाब मिले ख़ूब करम के छींटेअब्र-ए-रहमत का यहाँ ज़ोर-ए-बरसना देखो

धूम देखी है दर-ए-का'बा पे बेताबों कीउन के मुश्ताक़ों में हसरत का तड़पना देखो

मिस्ल-ए-परवाना फिरा करते थे जिस शम'अ के गिर्दअपनी उस शम'अ को परवाना यहाँ का देखो

ख़ूब आँखों से लगाया है ग़िलाफ़-ए-का'बाक़स्र-ए-महबूब के पर्दे का भी जल्वा देखो

वाँ मुती'ओं का जिगर ख़ौफ़ से पानी पायायाँ सियह-कारों का दामन पे मचलना देखो

अव्वलीं ख़ाना-ए-हक़ की तो ज़ियाएँ देखींआख़िरीं बैत-ए-नबी का भी तजल्ला देखो

ज़ीनत-ए-का'बा में था लाख 'अरूसों का बनावजल्वा-फ़रमा यहाँ कौनैन का दूल्हा देखो

ऐमन-ए-तूर का था रुक्न-ए-यमानी में फ़रोग़शो'ला-ए-तूर यहाँ अंजुमन-आरा देखो

मेहर-ए-मादर का मज़ा देती है आग़ोश-ए-हतीमजिन पे माँ-बाप फ़िदा याँ करम उन का देखो

'अर्ज़-ए-हाजत में रहा का'बा कफ़ील-ए-इंजाहआओ अब दाद-रसी-ए-शह-ए-तयबा देखो

धो चुका ज़ुल्मत-ए-दिल बोसा-ए-संग-ए-अस्वदख़ाक बोसी-ए-मदीना का भी रुत्बा देखो

कर चुकी रिफ़'अत-ए-का'बा पे नज़र परवाज़ेंटोपी अब थाम के ख़ाक-ए-दर-ए-वाला देखो

बे-नियाज़ी से वहाँ काँपती पाई ता'अतजोश-ए-रहमत पे यहाँ नाज़ गुनह का देखो

जुम'आ-ए-मक्का था 'ईद अहल-ए-'इबादत के लिएमुजरिमो ! आओ यहाँ 'ईद-ए-दो-शंबा देखो

मुल्तज़म से तो गले लग के निकाले अरमाँअदब-ओ-शौक़ का याँ बाहम उलझना देखो

ख़ूब मस'आ में ब-उम्मीद-ए-सफ़ा दौड़ लिएरह-ए-जानाँ की सफ़ा का भी तमाशा देखो

रक़्स-ए-बिस्मिल की बहारें तो मिना में देखींदिल-ए-ख़ूँ-नाबा फ़शाँ का भी तड़पना देखो

गौर से सुन तो, रज़ा ! का'बे से आती है सदामेरी आँखों से मेरे प्यारे का रौज़ा देखो

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