नात लिरिक्स

Hai Kalam-e-Ilahi Mein Shams-o-Duha Tere Chehra-e-Noor-faza Ki Qasam

है कलाम-ए-इलाही में शम्स-ओ-दुहा तेरे चेहरा-ए-नूर-फ़ज़ा की क़सम

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

है कलाम-ए-इलाही में शम्स-ओ-दुहा, तेरे चेहरा-ए-नूर-फ़ज़ा की क़समक़सम-ए-शब-ए-तार में राज़ ये था, कि हबीब की ज़ुल्फ़-ए-दोता की क़सम

तेरे ख़ुल्क़ को हक़ ने 'अज़ीम कहा, तेरी ख़िल्क़ को हक़ ने जमील कियाकोई तुझ सा हुआ है न होगा, शहा ! तेरे ख़ालिक़-ए-हुस्न-ओ-अदा की क़सम

वो ख़ुदा ने है मर्तबा तुझ को दिया, न किसी को मिले न किसी को मिलाकि कलाम-ए-मजीद ने खाई, शहा ! तेरे शहर-ओ-कलाम-ओ-बक़ा की क़सम

तेरा मसनद-ए-नाज़ है 'अर्श-ए-बरीं, तेरा महरम-ए-राज़ है रूह-ए-अमींतू ही सरवर-ए-हर-दो-जहाँ है, शहा ! तेरा मिस्ल नहीं है ख़ुदा की क़सम

यही 'अर्ज़ है, ख़ालिक़-ए-अर्ज़-ओ-समा ! वो रसूल हैं तेरे मैं बंदा तेरामुझे उन के जवार में दे वो जगह, कि है ख़ुल्द को जिस की सफ़ा की क़सम

तू ही बंदों पे करता है लुत़्फ़-ओ-'अता, है तुझी पे भरोसा तुझी से दु'आमुझे जल्वा-ए-पाक-ए-रसूल दिखा, तुझे अपने ही 'इज़्ज़-ओ-'उला की क़सम

मेरे गरचे गुनाह हैं हद से सिवा, मगर उन से उमीद है तुझ से रजातू रहीम है उन का करम है गवा, वो करीम हैं तेरी 'अता की क़सम

यही कहती है बुलबुल-ए-बाग़-ए-जिनाँ, कि रज़ा की तरह कोई सेहर-बयाँनहीं हिन्द में वासिफ़-ए-शाह-ए-हुदा, मुझे शोख़ी-ए-तब'-ए-रज़ा की क़सम

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।