नात लिरिक्स

Habib-e-Khuda Ka Nazara Karoon Main

हबीब-ए-ख़ुदा का नज़ारा करूँ मैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान नूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हबीब-ए-ख़ुदा का नज़ारा करूँ मैंदिल-ओ-जान उन पर निसारा करूँ मैं

तेरी कफ़्श-ए-पा यूँ सँवारा करूँ मैंकि पलकों से उस को बुहारा करूँ मैं

तेरी रहमतें 'आम हैं फिर भी, प्यारे !ये सदमात-ए-फ़ुर्क़त सहारा करूँ मैं

मुझे अपनी रहमत से तू अपना कर लेसिवा तेरे सब से किनारा करूँ मैं

मैं क्यूँ ग़ैर की ठोकरें खाने जाऊँतेरे दर से अपना गुज़ारा करूँ मैं

सलासिल मसाइब के अब्रू से काटोकहाँ तक मसाइब गवारा करूँ मैं

ख़ुदा-रा ! अब आओ कि दम है लबों परदम-ए-वापसीं तो नज़ारा करूँ मैं

तेरे नाम पर सर को क़ुर्बान कर केतेरे सर से सदक़ा उतारा करूँ मैं

ये इक जान क्या है ! अगर हों करोड़ोंतेरे नाम पर सब को वारा करूँ मैं

मुझे हाथ आए अगर ताज-ए-शाहीतेरी कफ़्श-ए-पा पर निसारा करूँ मैं

तेरा ज़िक्र लब पर, ख़ुदा दिल के अंदरयूँही ज़िंदगानी गुज़ारा करूँ मैं

दम-ए-वापसीं तक तेरे गीत गाउँमुहम्मद मुहम्मद पुकारा करूँ मैं

तेरे दर के होते कहाँ जाऊँ, प्यारे !कहाँ अपना दामन पसारा करूँ मैं

मेरा दीन-ओ-ईमाँ फ़रिश्ते जो पूछेंतुम्हारी ही जानिब इशारा करूँ मैं

ख़ुदा ऐसी क़ुव्वत दे मेरे क़लम मेंकि बद-मज़हबों को सुधारा करूँ मैं

ख़ुदा एक पर हो तो इक पर मुहम्मदअगर क़ल्ब अपना दो-पारा करूँ मैं

ख़ुदा ख़ैर से लाए वो दिन भी, नूरी !मदीने की गलियाँ बुहारा करूँ मैं

सबा ही से, नूरी ! सलाम अपना कह देसिवा इस के क्या और चारा करूँ मैं

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