नात लिरिक्स

Gunahon Se Nahin Hota Kinara Ya Rasoolallah | Sahara Do Sahara Do Sahara Ya Rasoolallah

गुनाहों से नहीं होता कनारा या रसूलल्लाह | सहारा दो सहारा दो सहारा या रसूलल्लाह

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

गुनाहों से नहीं होता कनारा, या रसूलल्लाह !फिरूँ कब तक मैं यूँही मारा मारा, या रसूलल्लाह !

सहारा दो, सहारा दो, सहारा, या रसूलल्लाह !ज़माने से मैं हारा आज हारा, या रसूलल्लाह !

जहन्नम में है तय जलना हमारा, या रसूलल्लाह !मगर जो आप फ़रमा दें इशारा, या रसूलल्लाह !

मेरे आ'माल मुझ को ले चले हैं नार-ए-दोज़ख़ मेंकहूँ किस मुँह से मैं भी हूँ तुम्हारा, या रसूलल्लाह !

न जाने आँख की ये रौशनी किस वक़्त छिन जाएदिखा दो शहर-ए-तयबा का नज़ारा, या रसूलल्लाह !

सबा ! एहसान कर देना, उन्हें बस इतना कह देनाबड़ी मुश्किल में है बंदा तुम्हारा, या रसूलल्लाह !

हुसैन इब्न-ए-'अली का वास्ता, नज़र-ए-करम कीजेअभी ग़र्दिश में है मेरा सितारा, या रसूलल्लाह !

उसी का वास्ता, शादाब को अपना बना लीजेवो जिस ने आप पर क़ुरआँ उतारा, या रसूलल्लाह !

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