नात लिरिक्स

Gunahon Ki Nahoosat Barh Rahi Hai Dam Ba Dam Maula

गुनाहों की नहूसत बढ़ रही है दम ब दम मौला

नात ख़्वान: क़ारी ख़लील अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

गुनाहों की नुहूसत बढ़ रही है दम-ब-दम, मौला !मैं तौबा पर नहीं रह पा रहा साबित-क़दम, मौला !

कमर तोड़ी है 'इस्याँ ने, दबाया नफ़्स-ओ-शैताँ नेन करना हश्र में रुस्वा, मेरा रखना भरम, मौला !

गुनाहों ने मुझे हाए ! कहीं का भी नहीं छोड़ाकरम हो अज़ तुफ़ैल-ए-सय्यिद-ए-'अरब-ओ-'अजम, मौला !

अँधेरी क़ब्र का एहसास है फिर भी नहीं जातींगुनाहों की ख़ुदाया ! 'आदतें, फ़रमा करम, मौला !

न करना हश्र में पुर्सिश, मेरी हो बे-सबब बख़्शिश'अता कर बाग़-ए-फ़िरदौस अज़ प-ए-शाह-ए-उमम, मौला !

गुनह करते हुए गर मर गया तो क्या करूँगा मैंबनेगा हाए मेरा क्या, करम फ़रमा करम, मौला !

ख़िरद करती नहीं अब काम, इलाही ! मैं हुआ नाकामतुझी से इल्तिजा है मुझ पे कर रहम-ओ-करम, मौला !

मुसलमाँ हूँ अगर-चे बद हूँ, सच्चे दिल से करता हूँतेरे हर हुक्म के आगे सर-ए-तस्लीम-ए-ख़म, मौला !

तू डर अपना 'इनायत कर, रहें इस डर से आँखें तरमिटा ख़ौफ़-ए-जहाँ दिल से, मिटा दुनिया का ग़म, मौला !

तू बस रहना सदा राज़ी, नहीं है ताब-ए-नाराज़ीतू नाख़ुश जिस से हो बर्बाद है तेरी क़सम, मौला !

चलूँ दुनिया से मैं इस शान से ऐ काश, या अल्लाह !शह-ए-अबरार की चौखट पे सर हो मेरा ख़म, मौला !

सुनहरी जालियों के सामने, ऐ काश ! ऐसा होनिकल जाए रसूल-ए-पाक के जल्वों में दम, मौला !

'अता कर 'आफ़ियत तू नज़'-ओ-क़ब्र-ओ-हश्र में, या रब !वसीला फ़ातिमा ज़हरा का कर लुत्फ़-ओ-करम, मौला !

इलाही ! पुल-सिरात इक पल के अंदर पार कर जाऊँतू कर ऐसी 'इनायत अज़ प-ए-शाह-ए-हरम, मौला !

मैं रहमत, मग़्फ़िरत, दोज़ख़ से आज़ादी का साइल हूँमह-ए-रमज़ान के सदक़े में फ़रमा दे करम, मौला !

बराअत दे 'अज़ाब-ए-क़ब्र से, नार-ए-जहन्नम सेमह-ए-शा'बान के सदक़े में कर फ़ज़्ल-ओ-करम, मौला !

'इबादत में, रियाज़त में, तिलावत में लगा दे दिलरजब का वासिता देता हूँ, फ़रमा दे करम, मौला !

बना मुझ को मुहम्मद मुस्तफ़ा का 'आशिक़-ए-सादिक़तू दे दे सोज़-ए-सीना, कर 'इनायत चश्म-ए-नम, मौला !

नहीं दरकार वो ख़ुशियाँ, जो ग़फ़लत का बनें सामाँ'अता कर अपनी उल्फ़त, अपने प्यारे का तू ग़म, मौला !

ग़म-ए-'इश्क़-ए-नबी ऐसा 'अता फ़रमा प-ए-मुर्शिदहो ना'त-ए-मुस्तफ़ा सुनते ही मेरी आँख नम, मौला !

बचें बेकार बातों से, पढ़ें ऐ काश कसरत सेतेरे महबूब पर हर दम दुरूद-ए-पाक हम, मौला !

हमारी फ़ालतू बातों की 'आदत दूर हो जाएलगाएँ मुस्तक़िल क़ुफ़्ल-ए-मदीना लब पे हम, मौला !

जिसे नेकी की दा'वत दूँ, उसे दे दे हिदायत तूज़बाँ में दे असर, कर दे 'अता ज़ोर-ए-क़लम, मौला !

इलाही ! हर मुबल्लिग़ पैकर-ए-इख़्लास बन जाएकरम हो दा'वत-ए-इस्लामी वालों पर करम, मौला !

ज़माने के मसाइब ने, इलाही ! घेर रखा हैप-ए-शाह-ए-मदीना दूर हों रंज-ओ-अलम, मौला !

रसूल-ए-पाक की दुखियारी उम्मत पर 'इनायत करमरीज़ों, ग़म-ज़दों, आफ़त-नसीबों पर करम, मौला !

प-ए-शाह-ए-मदीना अब मुशर्रफ़ हज से फ़रमा देचले 'अत्तार फिर रोता हुआ सू-ए-हरम, मौला !

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