नात लिरिक्स

Ghaus-e-Azam Ba-Man-e-Be-Sar-o-Saman Madade | Ghous e Azam Bamane Be Saro Saman Madade (All Versions)

ग़ौस-ए-आज़म ब-मन-ए-बे-सर-ओ-सामाँ मददे

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: हम्ज़ा ऐनी मारहरवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़ौस-ए-आ'ज़म ब-मन-ए-बे-सर-ओ-सामाँ मददेक़िब्ला-ए-दीं मददे का'बा-ए-ईमाँ मददे

वाह ! क्या मर्तबा, ऐ ग़ौस ! है बाला तेराऊँचे ऊँचों के सरों से क़दम आ'ला तेरा

सर भला क्या कोई जाने कि है कैसा तेराऔलिया मलते हैं आँखें वो है तल्वा तेरा

क्या दबे जिस पे हिमायत का हो पंजा तेराशेर को ख़तरे में लाता नहीं कुत्ता तेरा

तू हुसैनी-हसनी क्यूँ न मुहिय्युद्दीं होऐ ख़िज़र ! मज्म'-ए-बहरैन है चश्मा तेरा

क़समें दे दे के खिलाता है, पिलाता है तुझेप्यारा अल्लाह तेरा, चाहने वाला तेरा

मुस्तफ़ा के तन-ए-बे-साया का साया देखाजिस ने देखा मेरी जाँ जल्वा-ए-ज़ेबा तेरा

इब्न-ए-ज़हरा को मुबारक हो 'अरूस-ए-क़ुदरतक़ादिरी पाएँ तसद्दुक़, मेरे दूल्हा ! तेरा

क्यूँ न क़ासिम हो कि तू इब्न-ए-अबिल-क़ासिम हैक्यूँ न क़ादिर हो कि मुख़्तार है बाबा तेरा

नबवी मींह, 'अलवी फ़स्ल, बतूली गुलशनहसनी फूल, हुसैनी है महकना तेरा

नबवी ज़िल, 'अलवी बुर्ज, बतूली मंज़िलहसनी चाँद, हुसैनी है उजाला तेरा

नबवी ख़ुर, 'अलवी कोह, बतूली मा'दिनहसनी ला'ल, ह़ुसैनी है तजल्ला तेरा

बहर-ओ-बर, शहर-ओ-क़ुरा, सहल-ओ-हुज़ुन, दश्त-ओ-चमनकौन से चक पे पहुँचता नहीं दा'वा तेरा

हुस्न-ए-निय्यत हो ख़ता फिर कभी करता ही नहींआज़माया है, यगाना है दोगाना तेरा

'अर्ज़-ए-अहवाल की प्यासों में कहाँ ताब मगरआँखें, ऐ अब्र-ए-करम ! तक्ती हैं रस्ता तेरा

मौत नज़्दीक, गुनाहों की तहें, मैल के ख़ौलआ बरस जा कि नहा धो ले ये प्यासा तेरा

आब आमद वो कहे और मैं तयम्मुम बरख़ास्तमुश्त-ए-ख़ाक अपनी हो और नूर का अहला तेरा

जान तो जाते ही जाएगी क़ियामत ये हैकि यहाँ मरने पे ठहरा है नज़्ज़ारा तेरा

तुझ से दर, दर से सग और सग से है मुझ को निस्बतमेरी गर्दन में भी है दूर का डोरा तेरा

इस निशानी के जो सग हैं, नहीं मारे जातेहश्र तक मेरे गले में रहे पट्टा तेरा

मेरी क़िस्मत की क़सम खाएँ सगान-ए-बग़दादहिन्द में भी हूँ तो देता रहूँ पहरा तेरा

तेरी 'इज़्ज़त के निसार, ऐ मेरे ग़ैरत वाले !आह सद आह कि यूँ ख़्वार हो बिरवा तेरा

बद सही, चोर सही, मुजरिम-ओ-नाकारा सहीऐ वो कैसा ही सही है तो, करीमा ! तेरा

मुझ को रुस्वा भी अगर कोई कहेगा तो यूँ हीकि वही ना, वो रज़ा बंदा-ए-रुस्वा तेरा

हैं रज़ा यूँ न बिलक तू नहीं जय्यिद तो न होसय्यिद-ए-जय्यिद-ए-हर-दहर है मौला तेरा

फ़ख़्र-ए-आक़ा में, रज़ा ! और भी इक नज़्म-ए-रफ़ी'चल लिखा लाएँ सना-ख़्वानों में चेहरा तेरा

तू है वो ग़ौस कि हर ग़ौस है शैदा तेरातू है वो ग़ैस कि हर ग़ैस है प्यासा तेरा

सूरज अगलों के चमकते थे, चमक कर डूबेउफ़ुक़-ए-नूर पे है मेहर हमेशा तेरा

मुर्ग़ सब बोलते हैं, बोल के चुप रहते हैंहाँ असील एक नवा-संज रहेगा तेरा

जो वली क़ब्ल थे या बा'द हुए या होंगेसब अदब रखते हैं दिल में, मेरे आक़ा ! तेरा

ब-क़सम कहते हैं शाहान-ए-सरीफ़ैन-ओ-हरीमकि हुवा है न वली हो कोई हम्ता तेरा

तुझ से और दहर के अक़्ताब से निस्बत कैसीक़ुत्ब ख़ुद कौन है ! ख़ादिम तेरा चेला तेरा

सारे अक़्ताब-ए-जहाँ करते हैं का'बे का तवाफ़का'बा करता है तवाफ़-ए-दर-ए-वाला तेरा

और परवाने हैं जो होते हैं का'बे पे निसारशम्'अ इक तू है कि परवाना है का'बा तेरा

शजर-ए-सर्वे सही किस के उगाए तेरेमा'रिफ़त फूल सही किस का खिलाया तेरा

तू है नौ-शाह, बराती है ये सारा गुलज़ारलाई है फ़स्ल-ए-समन गूँध के सेहरा तेरा

डालियाँ झूमती हैं रक़्स-ए-ख़ुशी जोश पे हैबुलबुलें झूलती हैं गाती हैं सेहरा तेरा

गीत कलियों की चटक ग़ज़लें हज़ारों की चहकबाग़ के साज़ों में बजता है तराना तेरा

सफ़-ए-हर-शजरा में होती है सलामी तेरीशाख़ें झुक झुक के बजा लाती हैं मुजरा तेरा

किस गुलिस्ताँ को नहीं फ़स्ल-ए-बहारी से नियाज़कौन से सिलसिले में फ़ैज़ न आया तेरा

नहीं किस चाँद की मंज़िल में तेरा जल्वा-ए-नूरनहीं किस आईने के घर में उजाला तेरा

राज किस शहर में करते नहीं तेरे ख़ुद्दामबाज किस नहर से लेता नहीं दरिया तेरा

मज़रा'-ए-चिश्त-ओ-बुख़ारा व 'इराक़-ओ-अजमेरकौन सी किश्त पे बरसा नहीं झाला तेरा

और महबूब हैं, हाँ पर सभी यक्साँ तो नहींयूँ तो महबूब है हर चाहने वाला तेरा

उस को सौ फ़र्द सरापा ब-फ़राग़त ओढ़ेंतंग हो कर जो उतरने को हो नीमा तेरा

गर्दनें झुक गईं, सर बिछ गए, दिल लौट गएकश्फ़-ए-साक़ आज कहाँ ये तो क़दम था तेरा

ताज-ए-फ़र्क़-ए-'उरफ़ा किस के क़दम को कहिए ?सर जिसे बाज दें वो पाँव है किस का तेरा

सुक्र के जोश में जो हैं वो तुझे क्या जानेंख़िज़्र के होश से पूछे कोई रुत्बा तेरा

आदमी अपने ही अहवाल पे करता है क़ियासनशे वालों ने भला सुक्र निकाला तेरा

वो तो छूटा ही कहाँ चाहें कि हैं ज़ेर-ए-हज़ीज़और हर औज से ऊँचा है सितारा तेरा

दिल-ए-आ'दा को, रज़ा ! तेज़ नमक की धुन हैइक ज़रा और छिड़कता रहे ख़ामा तेरा

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