नात लिरिक्स

Firaq-e-Madina Mein Dil Ghamzada Hai

फ़िराक़-ए-मदीना में दिल ग़म-ज़दा है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़िराक़-ए-मदीना में दिल ग़म-ज़दा हैजिगर टुकड़े टुकड़े हुआ जा रहा है

छुड़ा कर मदीना, मेरा चैन छीनाबता नफ़्स-ए-ज़ालिम तुझे क्या मिला है

दिखाया है दिन ये मुक़द्दर ने मुझ कोन शिकवा किसी से, न कोई गिला है

मेरी आँख से छीना तयबा का मंज़रये किस बात का तू ने बदला लिया है

रहूँ बस इसी ग़म में बेचैन, सरवर !मुक़द्दर ने जो दाग़-ए-फ़ुर्क़त दिया है

मुक़द्दर से जिस जा रहूँ पर, शहा ! होनज़र में मदीना, मेरी इल्तिजा है

सुकूँ था मुझे कूचा-ए-मुस्तफ़ा मेंवतन में मेरा सब सुकूँ लुट गया है

मेरे दिल के अरमाँ रहे दिल ही दिल मेंयही ग़म मेरे दिल को तड़पा रहा है

न दुनिया की फ़िक्रें, न ग़म था वहाँ परयहाँ आ के दिल आफ़तों में गिरा है

पहाड़ों की दिलकश क़तारों के जल्वेवो मंज़र मुझे आज याद आ रहा है

उन्हें चूमना हाथ लहरा के पैहमवो मंज़र मुझे आज याद आ रहा है

'अक़ीदत से ख़ाक-ए-मदीना उठा करउसे चूमना आज याद आ रहा है

कभी दीद-ए-सरवर की हसरत में मिम्बरको तकना वो छुप छुप के याद आ रहा है

कभी देख कर सब्ज़ गुंबद का मंज़रझुकाना नज़र आज याद आ रहा है

न छूटे मेरे हाथ से उन का दामनजियूँ जब तलक, या ख़ुदा ! ये दु'आ है

महकती है प्यारी, वो जन्नत की क्यारीवहाँ बैठना आज याद आ रहा है

बिछड़ कर 'उबैद-ए-रज़ा उन के दर सेपरेशान है, ख़्वार है, ग़म-ज़दा है

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