नात लिरिक्स

Fajr Ka Waqt Ho Gaya Utho | Sada-e-Madina

फ़ज्र का वक़्त हो गया उठ्ठो | सदा-ए-मदीना

नात ख़्वान: हाजी मुश्ताक़ अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़ज्र का वक़्त हो गया उठ्ठोऐ ग़ुलामान-ए-मुस्तफ़ा ! उठ्ठो

जागो जागो, ऐ भाईओ, बहनो !छोड़ दो अब तो बिस्तरा, उठ्ठो

तुम को हज की ख़ुदा स'आदत देजल्वा देखो मदीने का, उठ्ठो

उठ्ठो, ज़िक्र-ए-ख़ुदा करो उठ करदिल से लो नाम-ए-मुस्तफ़ा, उठ्ठो

फ़ज्र की हो चुकीं अज़ानें, वक़्तहो गया है नमाज़ का, उठ्ठो

भाईओ ! उठ कर अब वुज़ू कर लोऔर चलो ख़ाना-ए-ख़ुदा, उठ्ठो

नींद से तो नमाज़ बेहतर हैअब न मुत्लक़ भी लेटना, उठ्ठो

उठ चुको अब खड़े भी हो जाओआँख शैताँ न दे लगा, उठ्ठो

जागो जागो नमाज़ ग़फ़्लत सेकर न बैठो कहीं क़ज़ा, उठ्ठो

अब जो सोए नमाज़ खोए, वक़्तसोने का अब नहीं रहा, उठ्ठो

याद रख्खो, नमाज़ गर छोड़ीक़ब्र में पाओगे सज़ा, उठ्ठो

बे-नमाज़ी फँसेगा महशर मेंहोगा नाराज़ किब्रिया, उठ्ठो

मैं सदा-ए-मदीना देता हूँतुम को तयबा का वासिता, उठ्ठो

मैं भिकारी नहीं हूँ दर दर कामैं हूँ सरकार का गदा, उठ्ठो

मुझ को देना न पाई पैसा तुममैं हूँ तालिब सवाब का, उठ्ठो

तुम को देता है ये दु'आ 'अत्तारफ़ज़्ल तुम पर करे ख़ुदा, उठ्ठो

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