नात लिरिक्स

Ek Nazar Aasman Pe Dal Marhaba | Chamka Mah-e-Noor Ka Hilal Marhaba

एक नज़र आसमाँ पे डाल मरहबा | चमका माह-ए-नूर का हिलाल मरहबा

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

एक नज़र आसमाँ पे डाल, मरहबा !चमका माह-ए-नूर का हिलाल, मरहबा !

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

झंडे लगाओ, गलियाँ सजाओकर लो चराग़ाँ, घर जगमगाओराज़ी होगा रब्ब-ए-ज़ुल्जलाल, मरहबा !

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

महफ़िल सजाएँ, ना'तें सुनाएँआक़ा की आमद की धूमें मचाएँरोज़-ओ-शब यही हो अपना हाल, मरहबा !

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

ला-रैब नबियों के सालार आएआए दो 'आलम के ग़म-ख़्वार आएशाहकार-ए-रब्ब-ए-ज़ुल्जलाल, मरहबा !

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

'आशिक़ के दिल जगमगाने लगे हैंदेखो ज़रा मुस्कुराने लगे हैंदीदनी है उन के ख़द-ओ-ख़ाल, मरहबा !

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

सदक़ा विलादत का जल्वा दिखा दोदिल की लगी अब तो, आक़ा ! बुझा दोदिखला दो अपना अब जमाल, मरहबा !

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

जूद-ओ-सख़ावत है 'आदत तुम्हारीफैलाए दामन खड़े हैं भिकारीकर दो करम आमिना के लाल, मरहबा !

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

जाम-ए-शहादत पिया है जिन्हों नेअहल-ए-सुनन को जिला दी उन्हों नेयाद आएँगे वो हर साल, मरहबा !

शादी के नग़्मे सुनाते रहेंगेजश्न-ए-विलादत मनाते रहेंगेवार देंगे तुम पे जान-ओ-माल, मरहबा !

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

पढ़ने लगा जब 'उबैद उन की ना'तेंहोने लगीं चार-सू उस की बातेंफ़ैज़-ए-रज़ा का है सब कमाल, मरहबा !

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

बेकसों से है जिन्हें प्यारा वोही आए हैंजो दो 'आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं

या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा !या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा !

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