नात लिरिक्स

Dhoondhte Dhoondhte Is Dahr Mein Thak Jaaoge

ढूँढते ढूँढते इस दहर में थक जाओगे

नात ख़्वान: अब्दुल वकील मुबारकपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ढूँढते ढूँढते इस दहर में थक जाओगेऐसा मुर्शिद न ज़माने में कहीं पाओगे

जब कभी शहर-ए-बरेली की तरफ़ जाओगेउन के रौज़े पे मदीने की हवा पाओगे

वो वली इब्न-ए-वली हैं, वो सख़ी इब्न-ए-सख़ीउन के दरबार से ख़ाली न कभी आओगे

आँसूओ ! अब मेरी आँखों ही में रहना सीखोदामन-ए-मुफ़्ती-ए-आ'ज़म न कहीं पाओगे

आँसूओ ! अब मेरी आँखों ही में रहना सीखोदामन-ए-ताज-ए-शरी'अत न कहीं पाओगे

मेरी रोती हुई आँखों ने पुकारा है तुम्हेंए मेरे शैख़ ! मेरे ख़्वाब में कब आओगे

क्या मेरे घर की उदासी न कभी जाएगी ?क्या ग़रीबों के यहाँ अब न कभी आओगे ?

कौन सुनता है यहाँ राज़ फ़ुग़ानी दरवेशदिल-ए-बेताब लिये किस की तरफ़ जाओगे

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