नात लिरिक्स

Daman Mein Yun Chhupa Lo Digar Ko Khabar Na Ho | Pul Se Utaro Rah Guzar Ko Khabar Na Ho With Tazmeen

दामन में यूँ छुपा लो दिगर को ख़बर न हो | पुल से उतारो राह-गुज़र को ख़बर न हो तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दामन में यूँ छुपा लो दिगर को ख़बर न होहूर-ओ-मलक को जिन्न-ओ-बशर को ख़बर न होजन्नत में ऐसे पहुँचूँ सक़र को ख़बर न होपुल से उतारो राह-गुज़र को ख़बर न होजिब्रील पर बिछाएँ तो पर को ख़बर न हो

बुझ जाए अब कहीं न चराग़ इंतिज़ार काजुज़ तेरे कोई और नहीं दिल-फ़िगार काजा-ए-ख़िज़ाँ में देख लूँ अब मुँह बहार काकाँटा मेरे जिगर से ग़म-ए-रोज़गार कायूँ खींच लीजिए कि जिगर को ख़बर न हो

उम्मत से प्यार तेरा न आए शुमार मेंरक्खा न एक पल भी कभी इंतिज़ार मेंबेचैन क़ल्ब आया उसी पल क़रार मेंफ़रियाद उम्मती जो करे हाल-ए-ज़ार मेंमुमकिन नहीं कि ख़ैर-ए-बशर को ख़बर न हो

दर दर की ठोकरों से, ख़ुदाया ! बचा हमेंसदक़ा हसन हुसैन का कर दे 'अता हमेंदुनिया के रंज-ओ-ग़म से तू कर दे रिहा हमेंऐसा गुमा दे उन की विला में ख़ुदा हमेंढूँढा करे पर अपनी ख़बर को ख़बर न हो

जिन का मक़ाम करते बयाँ हों शह-ए-ज़माँकैसे फिर उन की शान बयाँ कर सके ज़बाँख़ुद मुस्तफ़ा ने मौला 'अली पर किया अयाँफ़रमाते हैं ये दोनों हैं सरदार-ए-दो-जहाँऐ मुर्तज़ा ! 'अतीक़-ओ-'उमर को ख़बर न हो

ये 'इश्क़ ही तो है जो सबक़ हम को ये पढ़ाएये 'इश्क़ ही तो है जो हमें राज़ ये सिखाएहद्द-ए-अदब ये 'इश्क़ सितम जितने दिल पे खाएये 'इश्क़ का उसूल है निकले न लब से हाएऐ ख़ार-ए-तयबा ! देख कि दामन न भीग जाएयूँ दिल में आ कि दीदा-ए-तर को ख़बर न हो

ईमान है कि कोई ख़ुदा से बड़ा नहींमहबूब हैं ख़ुदा के वो लेकिन ख़ुदा नहींहुक्म-ए-शर'अ में सज्दा भी उन को किया नहींऐ शौक़-ए-दिल ! ये सज्दा गर उन को रवा नहींअच्छा ! वो सज्दा कीजे कि सर को ख़बर न हो

अहबाब, 'उबैद ! जान छिड़कते हैं जो यहाँहोंगे ब-रोज़-ए-हश्र किसी के भी वो कहाँमाँ-बाप काम आएँ न औलाद ही वहाँउन के सिवा, रज़ा ! कोई हामी नहीं जहाँगुज़रा करे पिसर पे पिदर को ख़बर न हो

कलाम:इमाम अहमद रज़ा ख़ान

तज़मीन:ओवैस रज़ा क़ादरी

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