नात लिरिक्स

Chhod Fikr Duniya Ki, Chal Madine Chalte Hain

छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी

छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैंमुस्तफ़ा ग़ुलामों की क़िस्मतें बदलते हैं

छोड़ फ़िक्र दुनिया की

रहमतों के बादल के साए साथ चलते हैंमुस्तफ़ा के दीवानें घर से जब निकलते हैं

छोड़ फ़िक्र दुनिया की

हम को रोज़ मिलता है सदक़ा प्यारे आक़ा काउन के दर के टुकड़ों पर ख़ुश-नसीब पलते है

छोड़ फ़िक्र दुनिया की

आमिना के प्यारे का, सब्ज़-गुंबद वाले काजश्न हम मनाते हैं, जलने वाले जलते हैं

छोड़ फ़िक्र दुनिया की

सिर्फ़ सारी दुनिया में वो तयबा की गलियाँ हैंजिस जगह पे हम जैसे खोटे सिक्के चलते हैं

छोड़ फ़िक्र दुनिया की

सच है ग़ैर का एहसाँ वो कभी नहीं लेतेए 'अलीम ! आक़ा के जो टुकड़ों पे पलते हैं

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