नात लिरिक्स

Bul Hawas Sun Seem-o-Zar Ki Bandagi Achchhi Nahin | Un Ke Dar Ki Bheek Achchhi Sarwari Achchhi Nahin

बुल-हवस सुन सीम-ओ-ज़र की बंदगी अच्छी नहीं | उन के दर की भीक अच्छी सरवरी अच्छी नहीं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान क़ादरी अज़हरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बुल-हवस ! सुन सीम-ओ-ज़र की बंदगी अच्छी नहींउन के दर की भीक अच्छी, सरवरी अच्छी नहीं

सरवरी क्या चीज़ है उन की गदाई के हुज़ूरउन के दर की भीक अच्छी, सरवरी अच्छी नहीं

उन की चौखट चूम कर ख़ुद कह रही है सरवरीउन के दर की भीक अच्छी, सरवरी अच्छी नहीं

सरवरी ख़ुद है भिकारन बंदगान-ए-शाह कीउन के दर की भीक अच्छी, सरवरी अच्छी नहीं

सरवरी पा कर भी कहते हैं गदायान-ए-हुज़ूरउन के दर की भीक अच्छी, सरवरी अच्छी नहीं

ताज ख़ुद रा कासा कर्दा गोयद ईं जा ताजवरउन के दर की भीक अच्छी, सरवरी अच्छी नहीं

ताज को कासा बना कर ताजवर कहते हैं यूँउन के दर की भीक अच्छी, सरवरी अच्छी नहीं

मुफ़्ती-ए-आ'ज़म यके अज़ मर्दमान-ए-मुस्तफ़ाइस रज़ा-ए-मुस्तफ़ा से दुश्मनी अच्छी नहीं

हुज्जतुल-इस्लाम ऐ हामिद रज़ा बाबा-ए-मन !तुम को बिन देखे हमारी ज़िंदगी अच्छी नहीं

ख़ाक-ए-तयबा की तलब में ख़ाक हो ये ज़िंदगीख़ाक-ए-तयबा अच्छी, अपनी ज़िंदगी अच्छी नहीं

आरज़ूमंदान-ए-गुल काँटों से बचते हैं कहींख़ार-ए-तयबा से तेरी पहलू-तही अच्छी नहीं

दश्त-ए-तयबा के फ़िदाई से जिनाँ का तज़्किराजो रुला दे ख़ून ऐसी दिल-लगी अच्छी नहीं

दश्त-ए-तयबा छोड़ कर मैं सैर-ए-जन्नत को चलूँरहने दीजे, शैख़ जी ! दीवानगी अच्छी नहीं

जो जुनून-ए-ख़ुल्द में कव्वों को दे बैठे धरमऐसे अँधे शैख़ जी की पैरवी अच्छी नहीं

'अक़्ल चौ-पायों को दे बैठे हकीम-ए-थानवीमैं न कहता था कि सोहबत देव की अच्छी नहीं

याद-ए-जानाँ में म'आज़ल्लाह हस्ती की ख़बरयाद-ए-जानाँ में किसी से आगही अच्छी नहीं

शाम-ए-हिज्राँ में हमें है जुस्तुजू उस मेहर कीचौदवीं के चाँद ! तेरी चाँदनी अच्छी नहीं

तौक़-ए-तहज़ीब-ए-फ़िरंगी तोड़ डालो, मोमिनो !तीरगी अंजाम है ये रौशनी अच्छी नहीं

शाख़-ए-गुल पर ही बनाएँगे 'अनादिल आशियाँबर्क़ से कह दो कि हम से ज़िद तेरी अच्छी नहीं

जो पिया को भाए, अख़्तर ! वो सुहाना राग हैजिस से नाख़ुश हों पिया वो रागनी अच्छी नहीं

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।