नात लिरिक्स

Bheek Ata, Ai Nabi Mohtasham Ho, Mere Aaqa Nigaah-e-Karam Ho

भीक अता, ए नबी मोहतशम हो, मेरे आक़ा निगाह-ए-करम हो

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

भीक 'अता, ए नबी मोहतशम ! होमेरे आक़ा ! निगाह-ए-करम हो

दीद का हूँ तलबगार, आक़ा !हूँ अगरचे गुनहगार, आक़ा !इक झलक अपनी, सरकार आक़ा !अब दिखा दो न इक बार, आक़ा !इस गुनहगार पर भी करम होमेरे आक़ा ! निगाह-ए-करम हो

छूट जाए गुनाहों की 'आदतरब की दिल से करूँ मैं 'इबादतऐसी कर दे तू नज़र-ए-'इनायतबस तेरे ग़म में, माह-ए-रिसालत !दिल तड़पता रहे, आँख नम होमेरे आक़ा ! निगाह-ए-करम हो

है तमन्ना मेरी, मेरे दिलबर !देख लूँ, काश ! हर साल आ करतेरी मस्जिद के मेहराब-ओ-मिम्बरऔर रौज़े का पुर-कैफ़ मंज़रफिर बयाँ हाल बा-चश्म-ए-नम होमेरे आक़ा ! निगाह-ए-करम हो

याद आता है मुझ को वो मंज़रजब चला था मदीने से, दिलबर !मुज़्तरिब क़ल्ब था, आँख थी तरउस घड़ी 'अर्ज़ ये थी ज़ुबाँ परबार बार आऊँ ऐसा करम होमेरे आक़ा ! निगाह-ए-करम हो

'अर्ज़ करता 'उबैद-ए-रज़ा हैजो तेरे दर का अदना गदा हैमुश्किलों में, शहा ! ये गिरा हैतुझ से इमदाद ये चाहता हैदूर इस का हर इक रंज-ओ-ग़म होमेरे आक़ा ! निगाह-ए-करम हो

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