नात लिरिक्स

Behad Zaleel-o-Khwar Hun Maula Tu Bakhsh De

बेहद ज़लील-ओ-ख़्वार हूँ मौला तू बख़्श दे

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अद्ल करें ते थर थर कंबण उचियाँ शानाँ वालेफ़ज़्ल करें ते बख़्शे जावण मैं वर्गे मुँह काले

बेहद ज़लील-ओ-ख़्वार हूँ, मौला ! तू बख़्श देतौबा, मेरी तौबा, मेरी तौबा, तू बख़्श दे

मैं आज बे-क़रार हूँ, मौला ! तू बख़्श दे'इस्याँ के ज़ेर-ए-बार हूँ, मौला ! तू बख़्श देमग़्मूम-ओ-दिल-फ़िगार हूँ, मौला ! तू बख़्श देशर्मिंदा किर्दगार हूँ, मौला ! तू बख़्श दे

मैं ज़ार हूँ, निज़ार हूँ, मौला ! तू बख़्श देमैं ज़ार हूँ, निज़ार हूँ, मौला ! तू बख़्श दे

तौबा, मेरी तौबा ! तौबा, मेरी तौबा !

मैं ने भुला दिया, मुझे मरना है एक दिनमर कर अँधेरी क़ब्र में जाना है एक दिनआ'माल का हिसाब भी देना है एक दिनहाँ ! पुल-सिरात से भी गुज़रना है एक दिन

मुजरिम हूँ, ना-बकार हूँ, मौला ! तू बख़्श देमुजरिम हूँ, ना-बकार हूँ, मौला ! तू बख़्श दे

बेहद ज़लील-ओ-ख़्वार हूँ, मौला ! तू बख़्श देतौबा, मेरी तौबा, मेरी तौबा, तू बख़्श दे

कुछ रख सका लिहाज भी न ममनू'आत काक्या क्या न इर्तिकाब किया मुनकरात काहासिल न हो सका मुझे 'इरफ़ान ज़ात काअफ़सोस ! मैं ग़ुलाम रहा ख़्वाहिशात का

नादान हूँ, गँवार हूँ, मौला ! तू बख़्श देनादान हूँ, गँवार हूँ, मौला ! तू बख़्श दे

तौबा, मेरी तौबा ! तौबा, मेरी तौबा !

इस दर्जा बढ़ गई मेरे दिल की ये मुर्दगीमैं ला सका न अपने 'अमल में भी 'उम्दगीऔर कर सका न कुछ भी अदा हक़्क़-ए-बंदगीबर्बाद कर गया हूँ, ख़ुदा ! अपनी ज़िंदगी

ज़ाहिर में दीन-दार हूँ, मौला ! तू बख़्श देज़ाहिर में दीन-दार हूँ, मौला ! तू बख़्श दे

बेहद ज़लील-ओ-ख़्वार हूँ, मौला ! तू बख़्श देतौबा, मेरी तौबा, मेरी तौबा, तू बख़्श दे

कोई न देख ले यही धड़का मुझे लगातू देखता रहा, मुझे एहसास न रहामैं बद-लिहाज़, 'अफ़्व पे भूला रहा सदाबेशर्म बन गया, मुझे आई न कुछ हया

मैं वो सियाह-कार हूँ, मौला ! तू बख़्श देमैं वो सियाह-कार हूँ, मौला ! तू बख़्श दे

तौबा, मेरी तौबा ! तौबा, मेरी तौबा !

इक़रार है मुझे, मेरे मौला ! मैं हूँ ल'ईनमायूस पर नहीं तेरी रहमत से, ऐ रहीम !ख़ाली न भेज दर से तेरे, ऐ मेरे करीम !मेरे गुनह भी बख़्श, तेरी शान है 'अज़ीम

मैं भी उमीदवार हूँ, मौला ! तू बख़्श देमैं भी उमीदवार हूँ, मौला ! तू बख़्श दे

बेहद ज़लील-ओ-ख़्वार हूँ, मौला ! तू बख़्श देतौबा, मेरी तौबा, मेरी तौबा, तू बख़्श दे

करतूत देखता हूँ तो उठता है दिल में हौलरहमत पुकारती है कि मुसहफ़ ज़रा तू खोलला-तक़्नतू भी तुझ को मिलेगा ख़ुदा का क़ौलसारे गुनह धुलेंगे बस इक बार 'उबैद बोल

या रब ! मैं शर्मसार हूँ, मौला ! तू बख़्श देया रब ! मैं शर्मसार हूँ, मौला ! तू बख़्श दे

तौबा, मेरी तौबा ! तौबा, मेरी तौबा !तौबा, मेरी तौबा ! तौबा, मेरी तौबा !

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