नात लिरिक्स

Bahr-e-Haq Ke Shanawar Pe Lakhon Salam

बहर-ए-हक़ के शनावर पे लाखों सलाम

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: डॉ. मुशाहिद रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बहर-ए-हक़ के शनावर पे लाखों सलामबहर-ए-हिम्मत के गौहर पे लाखों सलाम

राकिब-ए-दोश-ए-अनवर पे लाखों सलामदिलबर-ए-शाह-ए-कौसर पे लाखों सलाम

सब्र के 'आली पैकर पे लाखों सलामया'नी शब्बीर-ओ-शब्बर पे लाखों सलाम

कर्बला के मु'अस्कर पे लाखों सलामसब हुसैनी सिपह-गर पे लाखों सलाम

जो मरातिब में हद-दर्जे मुमताज़ हैंअहल-ए-जन्नत के सरवर पे लाखों सलाम

शाह-ए-ख़ैबर-शिकन के वो नूर-ए-नज़रसय्यिदा के गुल-ए-तर पे लाखों सलाम

दे के सर अपना, बातिल किया सर-निगूँ'अज़मत-ए-इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम

क़ासिम इब्न-ए-हसन, ग़ाज़ी 'अब्बास परहम-शबीह-ए-पयम्बर पे लाखों सलाम

हम-शबीह-ए-पयम्बर इशारा भी दूँवो जवाँ-साल अकबर पे लाखों सलाम

कौसर-ओ-सलसबील जिस के नाना की मिल्कनन्हे उस प्यासे असग़र पे लाखों सलाम

उम्म-ए-'औन-ओ-मुहम्मद की क़ुर्बानियाँउन के पिसरान-ए-ख़ुशतर पे लाखों सलाम

जिन के ख़ुत्बे की हैबत से लर्ज़ां यज़ीददुख़्तर-ए-मौला-हैदर पे लाखों सलाम

जिस ने आल-ए-नबी पर फ़िदा जान कीउस के 'आली मुक़द्दर पे लाखों सलाम

कर दी सब्र-ओ-रिज़ा की रक़म दास्ताँउस जवाँ-'अज़्म तेवर पे लाखों सलाम

क्या निभाई है इब्न-ए-'अली से वफ़ाकर्बला के बहत्तर पे लाखों सलाम

थे बहत्तर, बयासी ख़ुदा को ख़बरसारे जी-दार लश्कर पे लाखों सलाम

सारा कुन्बा रह-ए-हक़ में क़ुर्बां हुआअहल-ए-बैत-ए-पयम्बर पे लाखों सलाम

दम-ब-दम क्यूँ मुशाहिद न पढ़ता रहेआल-ए-महबूब-ए-दावर पे लाखों सलाम

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