नात लिरिक्स

Bahar-e-Jaan-fiza Tum Ho Naseem-e-Gulsitan Tum Ho

बहार-ए-जाँ-फ़िज़ा तुम हो नसीम-ए-गुलसिताँ तुम हो

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुस्तफ़ा रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बहार-ए-जाँ-फ़िज़ा तुम हो, नसीम-ए-गुलसिताँ तुम होबहार-ए-बाग़-ए-रिज़वाँ तुम से है, ज़ेब-ए-जिनाँ तुम हो

हक़ीक़त से तुम्हारी जुज़ ख़ुदा और कौन वाक़िफ़ है ?कहे तो क्या कहे कोई चुनीं तुम हो चुनाँ तुम हो

ख़ुदा की सल्तनत का दो जहाँ में कौन दूल्हा है ?तुम ही तुम हो, तुम ही तुम हो, यहाँ तुम हो, वहाँ तुम हो

तुम्हारा नूर ही सारी है इन सारी बहारों मेंबहारों में निहाँ तुम हो, बहारों से 'अयाँ तुम हो

कुजा हम ख़ाक-उफ़्तादा, कुजा तुम ऐ शह-ए-बाला !अगर मिस्ल-ए-ज़मीं हम हैं तो मिस्ल-ए-आसमाँ तुम हो

ये क्या मैं ने कहा मिस्ल-ए-समा तुम हो, म'आज़ल्लाहमुनज़्ज़ह मिस्ल से बर-तर ज़े-हर-वहम-ओ-गुमाँ तुम हो

मैं भूला आप की रिफ़'अत से निस्बत ही हमें क्या हैवो कहने भर की निस्बत थी, कहाँ हम हैं, कहाँ तुम हो

मैं बेकस हूँ, मैं बेबस हूँ, मगर किस का ? तुम्हारा हूँतह-ए-दामन मुझे ले लो, पनाह-ए-बेकसाँ तुम हो

हक़ीक़त में न बेकस हूँ, न बेबस हूँ, न ना-ताक़तमैं सदक़े जाऊँ, मुझ कमज़ोर के ताब-ओ-तवाँ तुम हो

हमें उम्मीद है रोज़-ए-क़यामत उन की रहमत सेकि फ़रमाएँ, इधर आओ न मायूस अज़-जिनाँ तुम हो

सितम-कारो ! ख़ता-कारो ! सिया-कारो ! जफ़ा-कारो !हमारे दामन-ए-रहमत में आ जाओ, कहाँ तुम हो ?

तुम्हारे होते साते दर्द-ओ-दुख किस से कहूँ, प्यारे !शफ़ी'-ए-'आसियाँ तुम हो, वकील-ए-मुजरिमाँ तुम हो

रियाज़त के यही दिन हैं बुढ़ापे में कहाँ हिम्मतजो कुछ करना हो अब कर लो अभी, नूरी ! जवाँ तुम हो

फ़क़त निस्बत का जैसा हूँ हक़ीक़ी नूरी हो जाऊँमुझे जो देखे कह उठे, मियाँ ! नूरी मियाँ तुम हो

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