नात लिरिक्स

Arz-o-Sama Bane Hain Isi Noor Ke Tufail

अर्ज़-ओ-समा बने हैं इसी नूर के तुफ़ैल

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अर्ज़-ओ-समा बने हैं इसी नूर के तुफ़ैलतारे चमक रहे हैं इसी नूर के तुफ़ैलगुलशन हरे-भरे हैं इसी नूर के तुफ़ैलदोनों जहाँ सजे हैं इसी नूर के तुफ़ैल

इस नूर का अज़ल से अबद तक है सिलसिलाये नूर वो है जिस का तरफ़-दार है ख़ुदा

अर्ज़-ओ-समा बने हैं इसी नूर के तुफ़ैलतारे चमक रहे हैं इसी नूर के तुफ़ैल

आया है राह-ए-रास्त दिखाने के वास्तेबंदों को उन के रब से मिलाने के वास्तेबुनियाद बुत-कदों की गिराने के वास्तेरस्म-ओ-रिवाज-ए-कुफ़्र मिटाने के वास्तेइंसाँ को बंदगी का सलीक़ा सिखाएगाये नूर ज़ुल्मतों को उजाले बनाएगा

अर्ज़-ओ-समा बने हैं इसी नूर के तुफ़ैलतारे चमक रहे हैं इसी नूर के तुफ़ैल

गुफ़्तार ला-जवाब है, किरदार बे-नज़ीरहामी सितम-ज़दों का, यतीमों का दस्त-गीरहल्क़ा-ब-गोश उस के हैं क्या शाह क्या फ़क़ीरइंसान रह सकेगा न इंसान का असीरभूका रहेगा ख़ुद वो जहाँ को खिलाएगावो अपने दुश्मनों को गले से लगाएगा

अर्ज़-ओ-समा बने हैं इसी नूर के तुफ़ैलतारे चमक रहे हैं इसी नूर के तुफ़ैल

पैग़ाम-ए-हक़ ये सारे जहाँ को सुनाएगाकीना-ज़दों को रश्क-ए-गुलिस्ताँ बनाएगाहर-गाम रहमतों के ख़ज़ाने लुटाएगाइंसान को ये दर्स-ए-उख़ुव्वत सिखाएगादेगा कुछ इस अदा से पैग़ाम-ए-दोस्तीज़हनों से दूर कर देगा सदियों की दुश्मनी

अर्ज़-ओ-समा बने हैं इसी नूर के तुफ़ैलतारे चमक रहे हैं इसी नूर के तुफ़ैल

ये साहिब-ए-जमाल है, ये साहिब-ए-कमालख़ुश-दिल है, ख़ुश-पसंद है, ख़ुश-ख़ुल्क़, ख़ुश-ख़िसालख़ल्लाक़-ए-दो-जहाँ की है तख़्लीक़-ए-बे-मिसालमुम्किन नहीं है इस को किसी दौर में ज़वालरौशन करेगा रुश्द-ओ-हिदायत के वो दिएबन जाएँगे सबक़ जो हर इक दौर के लिए

अर्ज़-ओ-समा बने हैं इसी नूर के तुफ़ैलतारे चमक रहे हैं इसी नूर के तुफ़ैल

बेशक यही है बा'इस-ए-तख़्लीक़-ए-काइनातचमकेगा उस के हुस्न से हर गोशा-ए-हयातरासिख़ है उस का क़ौल तो सच्ची है हर इक बातदिल में है उस के रहम, नज़र में है इल्तिफ़ातउस के करम की हद है न कोई हिसाब हैजिस पर निगाह डाल दे वो आफ़ताब है

अर्ज़-ओ-समा बने हैं इसी नूर के तुफ़ैलतारे चमक रहे हैं इसी नूर के तुफ़ैल

आया है मुफ़्लिसों की हिमायत लिए हुएमज़्लूमों बेकसों की मोहब्बत लिए हुएअहल-ए-गुनाह के हक़ में शफ़ा'अत लिए हुएसारे जहान के लिए रहमत लिए हुएहोगा उसी की ज़ात पे क़ुरआन का नुज़ूलवो आख़िरी किताब है, ये आख़िरी रसूल

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