नात लिरिक्स

Arsh Ki Aql Dang Hai Charkh Mein Aasman Hai

अर्श की अक़्ल दंग है चर्ख़ में आसमान है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अर्श की 'अक़्ल दंग है, चर्ख़ में आसमान हैजान-ए-मुराद अब किधर हाए तेरा मकान है

बज़्म-ए-सना-ए-ज़ुल्फ़ में मेरी 'अरूस-ए-फ़िक्र कोसारी बहार-ए-हश्त-ख़ुल्द छोटा सा 'इत्र-दान है

'अर्श पे जा के मुर्ग़-ए-'अक़्ल थक के गिरा ग़श आ गयाऔर अभी मंज़िलों परे पहला ही आस्तान है

'अर्श पे ताज़ा छेड़-छाड़ फ़र्श में तूर्फ़ा धूम-धामकान जिधर लगाइए तेरी ही दास्तान है

इक तेरे रुख़ की रौशनी चैन है दो जहान कीइन्स का उन्स उसी से है, जान की वो ही जान है

वो जो न थे तो कुछ न था, वो जो न हों तो कुछ न होजान हैं वो जहान की, जान है तो जहान है

गोद में 'आलम-ए-शबाब, हाल-ए-शबाब कुछ न पूछ !गुलबुन-ए-बाग़-ए-नूर की और ही कुछ उठान है

तुझ सा सियाह-कार कौन, उन सा शफ़ी' है कहाँफिर वो तुझी को भूल जाएँ, दिल ! ये तेरा गुमान है

पेश-ए-नज़र वो नौ-बहार, सज्दे को दिल है बे-क़राररोकिए सर को रोकिए, हाँ यही इम्तिहान है

शान-ए-ख़ुदा न साथ दे, उन के ख़िराम का वो बाज़सिदरा से ता-ज़मीं जिसे नर्म सी इक उड़ान है

बार-ए-जलाल उठा लिया, गरचे कलेजा शक़ हुआयूँ तो ये माह-ए-सब्ज़ा-रंग नज़रों में धान-पान है

ख़ौफ़ न रख, रज़ा ! ज़रा तू तो है 'अब्द-ए-मुस्तफ़ातेरे लिए अमान है, तेरे लिए अमान है

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