नात लिरिक्स

Arsh-e-Haq Hai Masnad-e-Rifat Rasoolullah Ki

अर्श-ए-हक़ है मसनद-ए-रिफ़अत रसूलुल्लाह की

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अर्श-ए-हक़ है मसनद-ए-रिफ़'अत रसूलुल्लाह कीदेखनी है हश्र में 'इज़्ज़त रसूलुल्लाह की

क़ब्र में लहराएँगे ता-हश्र चश्मे नूर केजल्वा फ़रमा होगी जब तल'अत रसूलुल्लाह की

काफ़िरों पर तेग़-ए-वाला से गिरी बर्क़-ए-ग़ज़बअब्र आसा छा गई हैबत रसूलुल्लाह की

ला-व-रब्बिल-'अर्श जिस को जो मिला उन से मिलाबटती है कौनैन में ने'मत रसूलुल्लाह की

वो जहन्नम में गया जो उन से मुस्तग़नी हुआहै ख़लीलुल्लाह को हाजत रसूलुल्लाह की

सूरज उल्टे पाँव पलटे, चाँद इशारे से हो चाकअंधे नज्दी ! देख ले क़ुदरत रसूलुल्लाह की

तुझ से और जन्नत से क्या मतलब, वहाबी ! दूर होहम रसूलुल्लाह के, जन्नत रसूलुल्लाह की

ज़िक्र रोके, फ़ज़्ल काटे, नुक़्स का जूयाँ रहेफिर कहे मर्दक कि हूँ उम्मत रसूलुल्लाह की

नज्दी ! उस ने तुझ को मोहलत दी कि इस 'आलम में हैकाफ़िर-ओ-मुर्तद पे भी रहमत रसूलुल्लाह की

हम भिकारी, वो करीम, उन का ख़ुदा उन से फ़ुज़ूँऔर ना कहना नहीं 'आदत रसूलुल्लाह की

अहल-ए-सुन्नत का है बेड़ा पार, असहाब-ए-हुज़ूरनज्म हैं और नाओ है 'इत्रत रसूलुल्लाह की

ख़ाक हो कर 'इश्क़ में आराम से सोना मिलाजान की इक्सीर है उल्फ़त रसूलुल्लाह की

टूट जाएँगे गुनहगारों के फ़ौरन क़ैद-ओ-बंदहश्र को खुल जाएगी ताक़त रसूलुल्लाह की

या रब ! इक सा'अत में धुल जाएँ सियह-कारों के जुर्मजोश में आ जाए अब रहमत रसूलुल्लाह की

है गुल-ए-बाग़-ए-क़ुदुस रुख़्सार-ए-ज़ेबा-ए-हुज़ूरसर्व-ए-गुलज़ार-ए-क़िदम क़ामत रसूलुल्लाह की

ऐ रज़ा ! ख़ुद साहिब-ए-क़ुरआँ है मद्दाह-ए-हुज़ूरतुझ से कब मुमकिन है फिर मिदहत रसूलुल्लाह की

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