नात लिरिक्स

Amal Ka Ho Jazba Ata Ya Ilaahi

अमल का हो जज़्बा अता या इलाही

नात ख़्वान: क़ारी ख़लील अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अमल का हो जज़्बा 'अता, या इलाही !गुनाहों से मुझ को बचा, या इलाही !

मैं पाँचों नमाज़ें पढ़ूँ बा-जमा'अतहो तौफ़ीक़ ऐसी 'अता, या इलाही !

मैं पढ़ता रहूँ सुन्नतें, वक़्त ही परहों सारे नवाफ़िल अदा, या इलाही !

दे शौक़-ए-तिलावत, दे ज़ौक़-ए-'इबादतरहूँ बा-वुज़ू मैं सदा, या इलाही !

हमेशा निगाहों को अपनी झुका करकरूँ ख़ाशि'आना दु'आ, या इलाही !

न नेकी की दा'वत में सुस्ती हो मुझ सेबना शाइक़-ए-क़ाफ़िला, या इलाही !

स'आदत मिले दर्स-ए-फ़ैज़ान-ए-सुन्नतकी रोज़ाना दो मर्तबा, या इलाही !

मैं मिट्टी के सादा से बर्तन में खाऊँचटाई का हो बिस्तरा, या इलाही !

सदा-ए-मदीना दूँ रोज़ाना, सदक़ाअबू-बक्र-ओ-फ़ारूक़ का, या इलाही !

हमेशा करूँ, काश ! पर्दे में पर्दातू पैकर हया का बना, या इलाही !

मैं नीची निगाहें रखूँ, काश ! अक्सर'अता कर दे शर्म-ओ-हया, या इलाही !

हर इक मदनी इन'आम, ए काश ! पाऊँकरम कर प-ए-मुस्तफ़ा, या इलाही !

लिबास अपना सुन्नत से आरास्ता हो'इमामा हो सर पर सजा, या इलाही !

सभी रुख़ पे इक मुश्त दाढ़ी सजाएँबनें 'आशिक़-ए-मुस्तफ़ा, या इलाही !

है 'आलिम की ख़िदमत यक़ीनन स'आदतहो तौफ़ीक़ इस की 'अता, या इलाही !

हो अख़लाक़ अच्छा, हो किरदार सुथरामुझे मुत्तक़ी तू बना, या इलाही !

ग़ुस्सीले मिज़ाज और तमस्ख़ुर की ख़स्लतसे 'अत्तार को तू बचा, या इलाही !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।