नात लिरिक्स

Ajab Karam Shahe Wala Tabar Karte Hain

अजब करम शह-ए-वाला तबार करते हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ान बरेलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अजब करम शह-ए-वाला तबार करते हैंकि ना-उमीदों को उम्मीदवार करते हैं

जमा के दिल में सफ़ें हसरत-ओ-तमन्ना कीनिगाह-ए-लुत्फ़ का हम इंतिज़ार करते हैं

मुझे फ़सुर्दगी-ए-बख़्त का अलम क्या होवो एक दम में ख़िज़ाँ को बहार करते हैं

ख़ुदा सगान-ए-नबी से ये मुझ को सुनवा देहम अपने कुत्तों में तुझ को शुमार करते हैं

मलाइका को भी हैं कुछ फ़ज़ीलतें हम परकि पास रहते हैं तौफ़-ए-मज़ार करते हैं

जो ख़ुश-नसीब यहाँ ख़ाक-ए-दर पे बैठते हैंजुलूस-ए-मसनद-ए-शाही से 'आर करते हैं

हमारे दिल की लगी भी वही बुझा देंगेजो दम में आग को बाग़-ओ-बहार करते हैं

इशारा कर दो तो बाद-ए-ख़िलाफ़ के झोंकेअभी हमारे सफ़ीने को पार करते हैं

तुम्हारे दर के गदाओं की शान 'आली हैवो जिस को चाहते हैं ताजदार करते हैं

गदा गदा है, गदा तो किया ही चाहे अदबबड़े बड़े तेरे दर का वक़ार करते हैं

तमाम ख़ल्क़ को मंज़ूर है रज़ा जिन कीरज़ा हुज़ूर की वो इख़्तियार करते हैं

सुना के वस्फ़-ए-रुख़-ए-पाक 'अंदलीब को हमरहीन-ए-आमद-ए-फ़स्ल-ए-बहार करते हैं

हवा ख़िलाफ़ हो, चकराए नाओ, क्या ग़म होवो एक आन में बेड़े को पार करते हैं

अना लहा से वो बाज़ार-ए-कस्म-पुर्सां मेंतसल्ली-ए-दिल-ए-बे-इख़्तियार करते हैं

बनाई पुश्त न का'बा की उन के घर की तरफ़जिन्हें ख़बर है वो ऐसा वक़ार करते हैं

कभी वो ताजवरान-ए-ज़माना कर न सकेंजो काम आप के ख़िदमत-गुज़ार करते हैं

हवा-ए-दामन-ए-जानाँ के जाँ-फ़िज़ा झोंकेख़िज़ाँ-रसीदों को बाग़-ओ-बहार करते हैं

सगान-ए-कू-ए-नबी के नसीब पर क़ुर्बांपड़े हुए सर-ए-रह इफ़्तिख़ार करते हैं

कोई ये पूछे मिरे दिल से मेरी हसरत सेकि टूटे हाल में क्या ग़म-गुसार करते हैं

वो उन के दर के फ़क़ीरों से क्यूँ नहीं कहतेजो शिकवा-ए-सितम-ए-रोज़गार करते हैं

तुम्हारे हिज्र के सदमों की ताब किस को हैये चोब-ए-ख़ुश्क को भी बे-क़रार करते हैं

किसी बला से उन्हें पहुँचे किस तरह आसेबजो तेरे नाम से अपना हिसार करते हैं

ये नर्म दिल हैं वो प्यारे कि सख़्तियों पर भी'अदू के हक़ में दु'आ बार बार करते हैं

कुशूद-ए-'उक़्दा-ए-मुश्किल की क्यूँ मैं फ़िक्र करूँये काम तो मिरे तयबा के ख़ार करते हैं

ज़मीन-ए-कू-ए-नबी के जो लेते हैं बोसेफ़रिश्तगान-ए-फ़लक उन को प्यार करते हैं

तुम्हारे दर पे गदा भी हैं हाथ फैलाएतुम्हीं से 'अर्ज़-ए-दु'आ शहरयार करते हैं

किसे है दीद-ए-जमाल-ए-ख़ुदा पसंद की ताबवो पूरे जल्वे कहाँ आशकार करते हैं

हमारे नख़्ल-ए-तमन्ना को भी वो फल देंगेदरख़्त-ए-ख़ुश्क को जो बार-दार करते हैं

पड़े हैं ख़्वाब-ए-तग़ाफ़ुल में हम मगर मौलातरह तरह से हमें होशियार करते हैं

सुना न मरते हुए आज तक किसी ने उन्हेंजो अपने जान-ओ-दिल उन पर निसार करते हैं

उन्हीं का जल्वा सर-ए-बज़्म देखते हैं पतंगउन्हीं की याद चमन में हज़ार करते हैं

मिरे करीम न आहो को क़ैद देख सके'अबस असीर-ए-अलम इंतिशार करते हैं

जो ज़र्रे आते हैं पा-ए-हुज़ूर के नीचेचमक के मेहर को वो शर्मसार करते हैं

जो मू-ए-पाक को रखते हैं अपनी टोपी मेंशुजा'अतें वो दम-ए-कार-ज़ार करते हैं

जिधर वो आते हैं अब उस में दिल हों या राहेंमहक से गेसुओं की मुश्कबार करते हैं

हसन की जान हो उस वुस'अत-ए-करम पे निसारकि इक जहान को उम्मीदवार करते हैं

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