नात लिरिक्स

Aise Hote Hain Ali Ke Naukar

ऐसे होते हैं अली के नौकर

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी और हाफ़िज़ अहसन क़ादरीशायर: मौलाना आसिम रिज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मौला 'अली ! मुश्किल-कुशा !मौला 'अली ! मुश्किल-कुशा !

वो नहीं मानते हैदर को ख़ुदा के जैसाबा'द नबियों के वो सिद्दीक़ को जाने आ'लावो नहीं मानते हैदर को नबी से बढ़ कर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकरऐसे होते हैं 'अली के नौकर

ज़िक्र-ए-सरकार में करते हैं जो दिन-रात बसर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकरऐसे होते हैं 'अली के नौकर

आल-ओ-असहाब-ए-नबी के हैं तराने लब पर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकरऐसे होते हैं 'अली के नौकर

'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !

दीन-ए-हक़ के लिए घर-बार लुटा देते हैंजो बहत्तर भी हज़ारों को मिटा देते हैंतोड़ देते हैं जो मैदान में बातिल की कमर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकरऐसे होते हैं 'अली के नौकर

'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !

'इल्म का बाब हैं और शेर ख़ुदा के हैं 'अलीवो 'अली, जिन को मेरे आक़ा की बेटी है मिलीझूम कर यूँ बयाँ करते हैं जो शान-ए-हैदर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकरऐसे होते हैं 'अली के नौकर

मुस्तफ़ा पे हैं फ़िदा ! मौला 'अली वाले !हैं सहाबा के गदा ! मौला 'अली वाले !नाम लें सिद्दीक़ का ! मौला 'अली वाले !चार यारों पे फ़िदा ! मौला 'अली वाले !

मुस्तफ़ा पे हैं फ़िदा ! हैं सहाबा के गदा !नाम लें सिद्दीक़ का ! चार यारों पर फ़िदा !

मौला 'अली वाले ! मौला 'अली वाले !मौला 'अली वाले ! मौला 'अली वाले !

'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !

इज़्ज़त-ए-आक़ा पे देते हैं जो पहरा हर-दमजिन के होंटों पे है लब्बैक का ना'रा हर-दमजिन के आगे न रुके जंग में कोई लश्कर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकरऐसे होते हैं 'अली के नौकर

'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !

कोई मौसम, कोई भी वक़्त, कोई भी 'इलाक़ा होजहाँ ज़िक्र-ए-'अली छेड़ा, वहाँ दीवाने आ बैठे

'अली वालों का मरना भी कोई मरने में मरना है !चले अपने मकाँ से और 'अली के दर पे जा बैठे

इधर रुख़्सत किया सब ने, उधर आए 'अली लेनेयहाँ सब रो रहे थे, हम वहाँ महफ़िल सजा बैठे

अभी मैं क़ब्र में लेटा ही था, इक नूर सा फैलाकि मेरे सामने तो ख़ुद 'अली-ए-मुर्तज़ा बैठे

'अली के नाम की महफ़िल सजी शहर-ए-ख़मोशाँ मेंथे जितने बा-वफ़ा वो सब के सब महफ़िल में आ बैठे

ये कौन आया कि इस्तिक़बाल को सब अम्बिया उट्ठेन बैठेगा कोई तब तक, न जब तक मुस्तफ़ा बैठे

'अली वाले जहाँ बैठे वहीं जन्नत बना बैठे

'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !

कोई बहलूल हुआ, कोई ग़ज़ाली है बनाकोई शिबली, कोई बग़दाद का वाली है बनातख़्त-ए-शाही को लगाई है किसी ने ठोकर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकरऐसे होते हैं 'अली के नौकर

'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !

ए मुसलमान ! सदा हैदरी किरदार पे चलऔर अक़्वाल-ए-'अली पर हो तेरा ऐसा 'अमलकि फ़रिश्ते भी कहें तेरी लहद के अंदर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकरऐसे होते हैं 'अली के नौकर

प्यारे सिद्दीक़ पे तुम सब्ब-ओ-शतम करते थेउन की नफ़रत में भी तहरीर रक़म करते थेक्या कहोगे जो कभी पूछेंगे तुम से हैदर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकर ?

'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !

'आशिक़-ए-मौला-'अली का है तरीक़ा जैसाअपना किरदार बना, आसिम-ए-रिज़वी ! ऐसादेख के तुझ को कहें ख़ुद ये जनाब-ए-हैदर

ऐसे होते हैं 'अली के नौकरऐसे होते हैं 'अली के नौकर

'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !'अली 'अली मौला 'अली ! 'अली 'अली मौला 'अली !

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